अमर उजाला ब्यूरो
बालसमंद (हिसार)।
राजस्थान से हरियाणा की सीमा में प्रवेश करने वाले ओवरलोडिड वाहनों पर लगाम लगाने के मकसद से जिले के गांव बालसमंद में लगाया गया स्थायी नाका पांचवें महीने में ही बंद कर दिया गया है। इसकी सूचना चेक पोस्ट कार्यालय पर चस्पा कर दी गई है। पांच महीने में यहां केवल 18 चालान किए गए थे। इस कारण यह नाका बंद किया।
प्रदेश सरकार के पास पड़ोसी राज्यों से हरियाणा की सीमा में ओवरलोडिड वाहनों के प्रवेश की सूचना मिल रही थी। ओवरलोडिड वाहनों पर शिकंजा कसने और उनसे राजस्व प्राप्ति के मकसद से सरकार ने प्रदेशभर में 25 के करीब सड़क मार्गों को चिह्नित किया था। स्थायी नाके लगाने के लिए हिसार में केवल बालसमंद को चुना गया था। राजस्थान बॉर्डर के पास भादरा-आदमपुर मार्ग पर स्थायी चेक पोस्ट की शुरुआत की गई थी। नाका शुरू करने से पहले डीसी और एडीसी ने भी मौका मुआयना किया था। भादरा-आदमपुर मार्ग पर बनाई गई स्थायी चेक पोस्ट पर पांच महीने में केवल 18 वाहनों के चालान किए गए। दो जनवरी से यहां चालान शुरू किए गए थे।
नाके के कार्यालय पर लटका ताला
नए आदेश जारी होने के बाद नाके के कार्यालय पर ताला लटका पड़ा है। प्रशासन की तरफ से सरकार के आदेश पर नाका बंद करने की सूचना भी कार्यालय पर चस्पा कर दी गई है।
ड्यूटी बन गई थी सजा
चेक पोस्ट पर 24 घंटे कर्मचारी तैनात किए गए थे, जोकि तीन शिफ्टों में काम कर रहे थे। चेक पोस्ट पर ड्यूटी करने वाली टीम में एक सुपरिंटेंडेंट/डिप्टी सुपरिंटेंडेंट, एक असिस्टेंट, दो क्लर्क, दो चपरासी, तीन पुलिस कर्मचारी और दो ड्राइवर शामिल होते थे। कर्मचारियों की रूटीन की ड्यूटी के अलावा यह ड्यूटी थी। इसके लिए किसी तरह के टीए-डीए का प्रावधान भी नहीं था। रात की पारी में ड्यूटी करना और अवकाश के दिन ड्यूटी करने वालों को यह सबसे बड़ी सजा महसूस हो रही थी।
लगातार बदलती थी ड्यूटी
चेक पोस्ट पर ड्यूटी देने वाले कर्मचारियों को स्थायी रूप से ड्यूटी नहीं दी गई थी। इसमें अलग-अलग विभागों के अधिकारियों को शामिल किया था। इन कर्मचारियों को भी कुछ घंटे ही पता लगता था कि उनकी नाके पर ड्यूटी है। नाके पर निगरानी के लिए चार सीसीटीवी भी लगाए गए थे।
सरकार के आदेश पर राजस्थान बॉर्डर के पास हिसार-भादरा मार्ग पर बनाए गए स्थायी नाके को बंद कर दिया गया है।
-अमरजीत सिंह मान, अतिरिक्त उपायुक्त