हिसार। जिले के 592 सरकारी स्कूलों में से केवल 150 में ही हाथ धोने की पूरी व्यवस्था है। बाकी 442 स्कूलों में कहीं साबुन की कमी है तो कहीं वॉश बेसिन उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को मध्याह्न भोजन से पहले हाथ धोने में परेशानी उठानी पड़ रही है।
स्वच्छता का पाठ पढ़ाने वाले स्कूलों में कई जगह बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। कुछ स्कूलों में शिक्षक अपनी निगरानी में बच्चों के हाथ धुलवाते हैं, जबकि कई जगह विद्यार्थियों को वॉशरूम के बाहर लगे नलों पर निर्भर रहना पड़ता है। कुछ स्कूलों में हाथ धोने के लिए अलग व्यवस्था भी नहीं है।
कहीं साबुन नहीं, कहीं बेसिन की कमी
हाथ धोने के लिए पानी के साथ साबुन और सुविधाजनक स्थान भी जरूरी हैं, लेकिन कई स्कूलों में ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कहीं नल होने के बावजूद साबुन नहीं मिलता तो कहीं साबुन रखने की जगह या वॉश बेसिन तक नहीं है। इससे बच्चों को नियमित रूप से स्वच्छ तरीके से हाथ धोने में दिक्कत होती है।
इन स्कूलों में व्यवस्था नहीं
जिले के गवर्नमेंट प्राइमरी स्कूल खरकड़ी और गवर्नमेंट गर्ल्स प्राइमरी स्कूल मतलोड़ा में विद्यार्थियों के हाथ धोने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। मध्याह्न भोजन से पहले यह कमी बच्चों की स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिहाज से परेशानी पैदा करती है।
व्यवस्था दुरुस्त करने की जरूरत
स्कूलों में पानी, साबुन और वॉश बेसिन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ नियमित निगरानी भी जरूरी है, ताकि विद्यार्थी भोजन से पहले और बाद में आसानी से हाथ धो सकें।
सुविधाओं की कमी से विद्यार्थियों को परेशानी
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के विनोद प्रभाकर ने बताया कि जिले के 592 सरकारी स्कूलों में से केवल 150 में हाथ धोने की पूरी व्यवस्था है। बाकी स्कूलों में कहीं साबुन तो कहीं वॉश बेसिन उपलब्ध नहीं है। मध्याह्न भोजन से पहले हाथ धोना जरूरी है लेकिन सुविधाओं की कमी से विद्यार्थियों को परेशानी होती है।
स्कूलों में हाथ धोने की व्यवस्था से जुड़ी कमियों को दूर किया जाएगा। जल्द ही सभी स्कूलों में सुधार किया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को जरूरी सुविधाएं मिल सकें।
- राम रतन, जिला शिक्षा अधिकारी।