अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। नगर निगम में वीरवार को वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट को लेकर बैठक हुई। इस बजट बैठक में भी प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के कर्मचारी पार्षदों के निशाने पर रहे। पार्षदों ने ब्रांच के कर्मचारियों पर अभद्र व्यवहार करने के आरोप लगाते हुए उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई।
वार्ड नंबर चार के पार्षद अनिल सैनी ने तो सीधा ब्रांच के अधीक्षक और एक अन्य कर्मचारी को सबके सामने कह डाला कि काम नहीं करना तो ना करो, लेकिन व्यवहार तो कम से कम ढंग से कर लो। कर्मचारियों के बोलने का तरीका सही नहीं है। फिर तैश में आकर अनिल सैनी ने कहा कि अगर काम नहीं होता तो घर बैठ जाओ। इसके बाद एक-एक करके अधिकतर पार्षदों ने प्रॉपर्टी टैक्स में पिछले सालों में हुई गड़बड़ियों की जांच करवाने की मांग की। आखिरकार मेयर गौतम सरदाना ने जांच के आदेश दिए। कमिश्रर अशोक कुमार गर्ग ने पार्षदों को आश्वस्त किया कि तीन महीने में जांच पूरी करवाकर दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई कर दी जाएगी।
जब काम सही नहीं हुआ तो कंपनी को क्यों दिए डेढ़ करोड़ से ज्यादा
पार्षदों ने सवाल उठाया कि पहले प्रॉपर्टी का सर्वे करने और बिल बांटने वाली कंपनी को डेढ़ करोड़ से ज्यादा की पेमेंट की गई है, जबकि काम आज तक सही नहीं हुआ है। शहरवासियों को अपने बिल ठीक करवाने के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं। फिर कंपनी की पेमेंट क्यों की गई। इसकी भी जांच होनी चाहिए। पार्षदों ने कहा कि यह पैसा तो पूरी तरह पानी में बहा दिया गया है। जिस अधिकारी ने पेमेंट की, उसे सस्पेंड किया जाना चाहिए।
दो घंटे में पारित हुआ 73 करोड़ 18 लाख 91 हजार रुपये का बजट
मेयर गौतम सरदाना की अध्यक्षता में बैठक सुबह सवा 11 बजे शुरू हुई। इसके बाद एक-एक करके सभी मदों की चर्चा करते हुए पार्षदों के समक्ष आय और व्यय की जानकारी दी गई। दो घंटे में चर्चा खत्म कर 73 करोड़ 18 लाख 91 हजार रुपये का बजट पारित कर दिया गया। इस बार का बजट पिछले बजट से 4 करोड़ 83 लाख रुपये अधिक का रखा गया। साल 2018-19 का बजट 68 करोड़ 35 लाख 91 हजार रुपये का था।
सबसे अधिक कमाई प्रॉपर्टी टैक्स से ही
नगर निगम की सबसे अधिक कमाई का जरिया प्रॉपर्टी टैक्स ही है। आगामी वित्त वर्ष में निगम प्रशासन ने प्रॉपर्टी टैक्स से नौ करोड़ रुपये एकत्रित करने का लक्ष्य रखा है। 15 करोड़ रुपये का एरियर भी रहेगा। इस तरह प्रॉपर्टी टैक्स से 24 करोड़ रुपये की आमदनी होनी है। हालांकि पिछली बार भी 22 करोड़ रुपये का लक्ष्य था। मगर उसमें से मात्र 12 करोड़ रुपये ही निगम जमा करवाया पाया है।
ये रहेंगे इनकम के मुख्य स्रोत
फुटकर -- 27 करोड़ 88 लाख 91 हजार
प्रॉपर्टी टैक्स -- 24 करोड़
रजिस्ट्रेशन फीस - 18 करोड़
दुकानों का किराया -- 14 करोड़ 50 लाख
डेंजरस एवं ऑफेंसिव ट्रेड लाइसेंस फीस - 50 लाख
विज्ञापन -- 90 लाख
तहबाजारी - 15 लाख
तीन महीने पहले बताने पर भी अवैध निर्माण पर नहीं हुई कार्रवाई : रोहिल्ला
बैठक में वार्ड नंबर आठ के पार्षद भूपसिंह रोहिल्ला ने कहा कि बिल्डिंग इंस्पेक्टर को उन्होंने नेताजी कॉलोनी में गली पर अवैध कब्जे की शिकायत तीन महीने पहले दी थी। सारे सुबूत भी दिए थे। मगर इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस पर कमिश्नर ने बिल्डिंग इंस्पेक्टर से पूछा तो उन्होंने बताया कि यह कॉलोनी अवैध है। फिर कमिश्नर ने कहा कि कालोनी अवैध हो, लेकिन निर्माण अवैध नहीं होना चाहिए। अगर ऐसा है, तो तुरंत प्रभाव से उस पर कार्रवाई की जाए।
पार्षदों को सफाई कर्मचारियों की सूची सौंपने के लिए कहा
वार्ड नंबर पांच की पार्षद ज्योति महाजन ने भी बैठक में कई मुद्दे उठाए। उन्होंने लावारिस पशुओं से निजात दिलाने के लिए कहा। इसके अलावा प्रत्येक पार्षद को उनके वार्ड में तैनात सफाई कर्मचारियों की सूची सौंपने के लिए कहा, ताकि सफाई नहीं होने पर कर्मचारियों से जवाब मांगा जा सके।
सरकारी विभागों में फंसा पैसा निकलवाने की मांग
वार्ड नंबर 14 से पार्षद अमित ग्रोवर ने सरकारी विभागों में फंसा प्रॉपर्टी टैक्स निकलवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कई विभाग ऐसे हैं, जिनमें लाखों रुपये टैक्स बकाया है। बार-बार नोटिस देने के बाद भी विभागों का पैसा जमा नहीं हुआ है। अगर यह पैसा जमा हो जाता है तो भी निगम की आमदनी बढ़ेगी। इस पर मेयर ने ब्रांच के कर्मचारियों से सरकारी विभागों से टैक्स की रिकवरी इसी महीने करने को कहा।
इन्होंने भी रखीं वार्डों की समस्याएं
बैठक में वार्ड नंबर दो की पार्षद कविता केडिया, वार्ड नंबर 15 के पार्षद प्रीतम सैनी, वार्ड नंबर 17 के पार्षद महेंद्र जुनेजा और वार्ड नंबर 19 के पार्षद नरेंद्र शर्मा ने भी अपने वार्ड की कई समस्याओं को बैठक में रखा।
मेयर को दो करोड़ व प्रत्येक पार्षद को मिलेंगे 10-10 लाख रुपये
बैठक में शहर में विकास कार्य करवाने के लिए मेयर को दो करोड़ रुपये और प्रत्येक पार्षद को 10-10 लाख रुपये दिए जाने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इस पैसे से मेयर व पार्षद वार्ड के विकास से संबंधित कोई भी कार्य करवा सकेंगे।