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ये देखो डीसी साहब प्राइमरी स्कूूल का हाल, क्या कर रहा है शिक्षा विभाग

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हिसार। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में एक तरफ जहां करोड़ों की लागत से बने आलिशान भवन हैं, वहीं दूसरी तरफ एचएयू कैंपस के राजकीय प्राथमिक पाठशाला के 166 विद्यार्थी प्रतिदिन मौत के साये में पढ़ाई करते हैं। केंद्र सरकार व हरियाणा सरकार के नियमों के बीच पेंच फंसा होने के कारण एचएयू कैंपस के प्राइमरी स्कूल का विकास नहीं हो रहा है। इस स्कूल में विद्यार्थियों के बैठने के लिए बैंच तक नहीं हैं। विद्यार्थी टाट पर बैठते हैं। स्कूल की सभी खिड़कियां टूटी हुई हैं। इस सर्द मौसम में टूटी हुई खिड़कियों से आती ठंडी हवा भी ठिठुरन बढ़ाती है।
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एचएयू की लेबर के बच्चों के लिए बना था स्कूल
यह स्कूल एचएयू कैंपस में सबसे पहले 1972-73 में पेड़ों के नीचे शुरू किया गया था। यहां स्कूल बनाने का मकसद एचएयू में निर्माण कार्य में जुटी लेबर के बच्चों को पढ़ाना था। मजदूरों के बच्चों को भी प्राथमिक शिक्षा मिल सके, इसलिए स्कूल शुरू किया गया। बाद में 1984-85 में यहां बिल्डिंग का निर्माण करवाया गया। 35 साल पुरानी यह बिल्डिंग अब जर्जर होती जा रही है। इसलिए स्कूल के स्टाफ से लेकर विद्यार्थी तक बिल्डिंग के पुन: निर्माण की मांग कर रहे हैं।

न शिक्षा विभाग का कोई ध्यान तो न यूनिवर्सिटी प्रशासन देख रहा
नाम न छापने की शर्त पर विद्यार्थियों ने बताया कि फर्श भी ठंडा रहता है। स्कूल की छत भी कमजोर हो चुकी है। हल्की सी बरसात होते ही छत से पानी टपकने लगता है। दीवारों की ईंटे भी भुरभुराने लगी हैं। स्कूल की कक्षाओं में बैठते समय हर बच्चे के मन में डर बना रहता है। विडंबना यह है कि स्कूल की हालत सुधारने में न तो शिक्षा विभाग रुचि दिखा रहा है और न ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कोई जहमत उठाई है। स्कूल मुखियाओं ने कई बार अधिकारियों का ध्यान दिलाने के लिए पत्र-व्यवहार किया। मगर जो भी अधिकारी आता है, वह खानापूर्ति करके वापस चला जाता है। लेकिन आज तक स्कूल के हालात नहीं सुधरे हैं।
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जमीन केंद्र सरकार की, विभाग हरियाणा सरकार का
यह प्राइमरी पाठशाला हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड और हरियाणा सरकार के अधीन आता है। मगर स्कूल की जमीन यूजीसी व केंद्र सरकार की है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार व यूनिवर्सिटी की जमीन होने के कारण हरियाणा शिक्षा निदेशालय स्कूल बिल्डिंग की रिपेयरिंग नहीं करवा सकता। हरियाणा बोर्ड का स्कूल होने के कारण यूनिवर्सिटी प्रशासन व यूजीसी स्कूल की रिपेयरिंग करवाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। हरियाणा सरकार द्वारा बनने वाले स्कूल भवनों के नक्शे व केंद्र सरकार के नक्शे भी अलग-अलग हैं। इस सबके बीच 166 बच्चों का भविष्य केंद्र सरकार व राज्य सरकार की नियमावली में उलझा हुआ है।

जमीन व बिल्डिंग दोनों यूनिवर्सिटी के अधीन है। स्कूल रिपेयरिंग का कार्य यूनिवर्सिटी प्रशासन ही करवा सकता है। हमने स्कूल की रिपेयरिंग करवाने के लिए यूनिवर्सिटी को लेटर लिखा है। शिक्षा विभाग की ओर से जो भी बजट स्कूल रिपेेयरिंग के लिए आएगा, वह बजट यूनिवर्सिटी को ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
देवेंद्र सिंह, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी।

इस प्राइमरी स्कूल के हालात सुधारने के लिए कई बार अधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है। स्कूल बिल्डिंग की खिड़कियां टूटी हुई है। इससे विद्यार्थियों को बहुत परेशानी होती है। स्कूल की रिपेयरिंग बहुत जरूरी है।
- जयभगवान नेहरा, इंचार्ज, राजकीय प्राथमिक पाठशाला, एचएयू कैंपस।

यह स्कूल यूनिवर्सिटी कैंपस में जरूर है। मगर इसकी देखरेख और संचालन के नियम शिक्षा विभाग के अनुसार ही है। इसलिए मरम्मत संबंधी काम भी शिक्षा विभाग की करवाए।
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- संदीप आर्य, पीआरओ, एचएयू।
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