पेटवाड़ में स्कूल की जमीन पर बने अवैध मकान गिराने के मामले में 35 दोषी करार
हिसार। पेटवाड़ गांव के सरकारी स्कूल की जमीन पर कब्जे को लेकर 8 जनवरी को 2008 को हुए विवाद में दो मकान गिराने के 35 लोगों को अदालत ने दोषी करार दिया है। इस मामले में सभी दोषियों को सजा दो फरवरी को सुनाई जाएगी। एक आरोपी की ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है। अदालत ने सभी दोषियों को भारतीय दंड संहित की धाराओं 148, 323, 332 और 427 में दोषी करार दिया, जबकि एससी-एसटी एक्ट और धारा 452 में बरी कर दिया।
मामले के अनुसार पेटवाड़ गांव में आठ जनवरी को 2008 को विवाद हुआ था। पेटवाड़ की करीब पौने चार एकड़ जमीन लड़कियों के स्कूल के लिए थी। ग्रामीणों का आरोप था कि कुछ लोग स्कूल की इस जमीन पर अवैध रूप से कब्जा किए हुए हैं। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत प्रशासन से भी की थी। इस मामले में गांव में कई बार पंचायतों का दौर भी चला था, लेकिन समाधान नहीं निकल सका था। इसी मामले केे लेकर दो पक्षों में तनाव पैदा हो गया था, जिसके चलते एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर हमला करते हुए उनके मकानों को ध्वस्त कर दिया था। ग्रामीणों का कहना था कि इस मामले में कुछ शरारती तत्वों ने उनके मकानों पर हमला किया था। मामले में नारनौंद पुलिस ने 52 नामजद लोगों सहित सैकड़ों अन्य लोगों के खिलाफ 148, 149, 452, 323, 506, 427, 332, 353 व एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।
11 साल बाद आया अदालत का फैसला
इस मामले में एडीजे देशराज चालिया की अदालत ने 11 साल बाद अपना फैसला सुनाते हुए 35 लोगों को दोषी करार दिया। इसके अलावा अदालत ने सभी आरोपियों को धारा 452 और एसएस-एसटी एक्ट के आरोपों से बरी कर दिया।
ये ठहराए गए दोषी
अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए लोगों में अमरीश, प्रदीप, राजेश, बजेसिंह, जसबीर, राजेश, रामकिशन, भीमसिंह, कुलबीर, प्रदीप, राजेश, राममेहर, राजकुमार, मनोज, राजेश, मनोज, रोहित, किस्मत, दयानंद, संदीप, हरपाल, बलवान, जयबीर, जगता, बीना सिंह, राजेश, धर्मेंद्र, मुकेश, कृष्ण, निर्मल, राजीव, धर्मबीर, सतबीर, सुरेश, अमित और राजू शामिल हैं। इनमें से एक की पहले ही मौत हो चुकी है।