सिवानी मंडी। पानी के इंतजाम में कई घंटे खप जाते हैं, लोग सुबह उठते ही पानी की तलाश शुरू कर देते हैं और टैंकर मोटा शुल्क देकर मंगवाने को मजबूर हैं। ये किस्सा है राजस्थान की सीमा से सटे एवं देश की राजधानी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के गृहक्षेत्र सिवानी सहित दिवंगत मुख्यमंत्री भजनलाल के ननिहाल गांव लीलस के अलावा दर्जनों गांवों का। खास बात यह है कि नहर से आने वाले पानी की एक-एक बूंद खेतों के लिए बंद कर दी गई है उसके बावजूद अधिकांश जल घर और जोहड़ सूखे पड़े है।
गांव सैनीवास, झुंपा, गैंडावास, बिधवान, मोतीपुरा, मिठ्ठी, मतानी, मोरकां, सिवाच, कलाली, तलवानी सहित अनेकों गांवों में पानी को लेकर मारामारी का माहौल पैदा होने की आशंकाएं जताई जा रही है। पूरी तरह से नहरी पानी पर निर्भर सिवानी इलाके की एक नहर तो बंद हो चुकी है दूसरी बंद होने वाली है। लेकिन दूसरी नहर में भी 350 क्यूसिक के बजाय मात्र 250 क्यूसिक पानी नहर में आ रहा है। जिसका असर नहर के अंतिम छोर पर स्थित सिवानी क्षेत्र के गांवों में हो रहा है। अंतिम छोर पर बसे इन गांवों में नहर का पानी कभी कभार ही पहुंच पाता है। समय पर और जरूरत से कम आने पर पानी यहां की हर जिंदगी पर भारी पड़ रहा है। हालात यह है कि इन गांवों में पानी के टैंक और पशुओं के लिए बनाए गए जोहड़ सूख चुके हैं और लोग पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं। इन गांवों में जन स्वास्थ्य विभाग पानी तो भेज रहा है लेकिन वह खारा होने के कारण लोगों के लिए उपयोगी साबित नहीं हो रहा है। जो लोग पानी खरीदने के काबिल हैं, वे पानी खरीद रहे हैं दूसरे खारे पानी के सहारे गला तर करने को मजबूर हैं।
-अंतिम छोर पर है नहर
गैंडावास के सरपंच रघुवीर कादियान, सैनीवास के सरपंच प्रतिनिधि सुरेश बिश्नोई, जिला पार्षद बलवान बागड़ी, बीडीसी सदस्य कुलदीप सिंह, किसान सभा के राज्य सचिव दयानंद पूनिया ने बताया कि आदमी तो आदमी पशुओं के लिए भी पानी का जुगाड़ लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। गैंडावास के ग्रामीण ईश्वर बिजारणिया, रणजीत गेट व ओमप्रकाश ने बताया कि कई घरों में तो ट्रैक्टरों के माध्यम से पानी की सप्लाई चार्ज लेकर फिक्स है और ग्रामीण उन्हें 500 रुपये प्रति माह शुल्क देते है। मवेशियों के लिए उन्हें पानी का अलग से इंतजाम करना पड़ता है। चूंकि गांवों के जलघर अरैर जलाश्य सूखे पड़े है।
-नहरों में मिल रहा है कम पानी
सिवानी तहसील के आधे से ज्यादा गांवों में सिवानी कैनाल से पानी आता है लेकिन डाबड़ा हेड से सिवानी कैनाल में 330 क्यूसिक पानी चलना चाहिए लेकिन हेड पर से ही पानी की मात्रा 250 क्यूसिक से भी कम है। गांवों में पानी की टंकियों में महज 3 से 4 फुट ही पानी बचा है और सिवानी कैनाल में पानी की आपूर्ति व दिनों की संख्या नहीं बढ़ाई गई तो पानी के यहां इस बार भी मारामारी का माहौल पैदा हो सकता है। किसान सभा के राज्य सचिव दयानंद पूनिया का आरोप है कि इस मामले में सिंचाई विभाग के अधिकारी नहीं बल्कि राजनेता जिम्मेदार है चूंकि इस हिस्से का पानी राजनेताओं के दबाव में उनके निर्वाचन क्षेत्रों में डाला जा रहा है।
- जलघरों की दी जा रही है प्राथमिकता: एसडीओ
सिंचाई विभाग के एसडीओ गोल्डी शर्मा ने बताया कि पीछे से जितना भी पानी मिल रहा है उसे जल घरों और जोहड़ों में ही सप्लाई किया जा रहा है। अधिकांश गांवों में जल घरों और जोहड़ों तक जरूरत का पानी पहुंचा दिया गया है। उनका प्रयास रहेगा कि सभी गांवों में समान रूप से पानी पहुंचा दिया जाए ताकि पेयजल संकट पर काबू पाया जा सके।