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मिर्चपुर से विस्थापित 254 परिवारों को ढंढूर में बसाएगी सरकार

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
वर्ष 2010 से विस्थापित मिर्चपुर के 254 परिवारों के लिए राहत भरी खबर आई है। प्रदेश सरकार अब उन्हें गांव ढंढूर में स्थायी ठिकाना उपलब्ध करवाएगी। इस आशय की जानकारी अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने दी है। बेदी वीरवार को गांव मिर्चपुर के बलराज सिंह, राजबीर सिंह चौहान और अन्य लोगों के साथ मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करने के बाद चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
गांव छोड़कर आए गए थे परिवार
21 अप्रैल, 2010 में मिर्चपुर में घटना घटी थी और उसके बाद वाल्मीकि समाज के 254 परिवार गांव छोड़कर हिसार चले गए थे। आठ साल से इन परिवारों को वेदपाल तंवर के फार्म हाउस पर ही ठिकाना मिला हुआ था। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 1 जनवरी 2017 को इन्हें स्थापित करने की घोषणा की थी और उसी पर अमल करते हुए इन्हें गांव ढंढूर में करीब दो महीने बाद एक जून तक आठ एकड़ जमीन पर बसाया जाएगा। जिन परिवारों की मिर्चपुर में घर की जितनी जमीन थी, उतनी जमीन गांव ढंढूर में दी जाएगी। हालांकि, सरकार ने नगर निगम हिसार, नगरपालिका बरवाला, उकलाना और नगर परिषद हांसी की जमीन पर स्थापित करने का विकल्प दिया था, लेकिन इन्होंने ढंढूर में बसने की इच्छा जाहिर की है। उन्होंने बताया कि एक एकड़ अतिरिक्त जमीन सामुदायिक केंद्र, प्राथमिक स्कूल व मंदिर खेड़ा आदि के लिए भी अलग से उपलब्ध करवाई जाएगी। मंत्री के अनुसार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी इनको मकान बनाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जाएगी।
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राहुल गांधी ने भी किया था गांव का दौरा
मिर्चपुर मामला 2010 में राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बना था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी उस समय मिर्चपुर का दौरा किया था। आठ साल से परिवार स्थायी बसेरे की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे। गांव छोड़ने की पीड़ा को झेल रहे इन परिवारों के लिए रोजगार तक की समस्या पैदा हो गई थी।
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फैसले पर जताई खुशी
तंवर फार्म हाउस में मौजूद इन परिवारों ने प्रदेश सरकार के इस फैसले पर खुशी जाहिर की है। परिवारों के अनुसार स्थायी बसेरा होने से उनका भविष्य सुरक्षित होगा। रोजगार के लिए भी सार्थक प्रयास किया जा सकेगा।
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