अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
दिवाली पर इस बार ओवर ऑल प्रदूषण पिछले साल की बजाए काफी कम रहा। वातावरण में धूल मिट्टी व धुंआ के कण काफी कम रहे। 20 से 22 प्रतिशत तक इस बार ध्वनि प्रदूषण भी कम रहा। क्षेत्रिय पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने शहर से दिवाली से ठीक एक सप्ताह पहले सैंपल लिए और ठीक दिवाली वाले दिन सैंपल लिए गए। दोनों की तुलना की गई तो पिछले सालों की बजाए काफी कम मात्रा में पॉल्यूशन दर्ज किया गया। इस बार लोगों ने बड़े पटाखे नहीं फोड़े मगर अनार, फुलझड़ी, रॉकेट इत्यादी खूब मात्रा में चलाए। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार वातावरण में दिवाली वाले दिन (एसओ टू) सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा 23.33 प्रतिशत थी। पिछले साल दिवाली वाले दिन वातावरण में सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा 21.6 प्रतिशत थी। अगर तुलना करें तो पिछले साल की बजाए इस साल सल्फर डाइऑक्साइड की मात्रा 8 प्रतिशत अधिक बढ़ गई।
लोगों ने 9 बजे से लेकर 11 बजे तक अधिक बजाए पटाखे
प्रशासन ने इस बार साढ़े 6 से साढ़े 9 बजे तक पटाखे बजाने की अनुमति दी थी। पिछले साल दिवाली वाले दिन यानी 30 अक्तूबर को 2016 को 78.1 डेसीबल तक ध्वनि प्रदूषण रहा। इस बार यह ध्वनि प्रदूषण अधिकत्तम 62.1 डेसीबल तक ही पहुंचा। लोगों ने प्रशासन के निर्देशो की धज्जियां उड़ाते हुए 9 बजे तो पटाखे बजाने शुरू किए। रात 11 बजे तक पटाखे बजाने का पीक ओवर्स रहा। 9 बजे 61.25 डेसीबल ध्वनि प्रदूषण था। यह रात 11 बजे तक 62.1 प्रतिशत पहुंच गया। हालांकि देर रात तक लोग पटाखे फोड़ते रहे पॉल्यूशन बोर्ड के इसके बाद का रिकॉर्ड नहीं था।
नाइट्रोजन की मात्रा घटी
इस बार नाइट्रोजन डाईऑक्साइड की मात्रा वातावरण में दिवाली के दिन पिछले साल की बजाए काफी कम रही। पिछली बार नाइट्रोजन डाईऑक्साइड की मात्रा 33.66 प्रतिशत थी। इस बार दिवाली के दिन नाइट्रोजन डाईऑक्साइड की मात्रा 19.33 प्रतिशत रही। यह पिछले यानी 2016 की बजाए इस साल दिवाली के दिन 42.5 प्रतिशत कम थी।
आरएसपीएम और एसपीएम की मात्रा भी घटी
दिवाली से एक सप्ताह पहले व दिवाली वाले दिन लिए गए सैंपल में पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के पास जो रिपोर्ट आई है। उसमें आरएसपीएम(रेस्पीरेटरी सस्पेंडेड पर्टीकुलेट मैटर) व एसपीएम (सस्पेंडेड पर्टीकुलेट मैटर) की मात्रा पिछले साल की बजाए इस बार घटी है। पिछले साल दिवाली वाले दिन ही आरएसपीएम 325.2 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूम तथा एसपीएम 389 माइक्रोग्राम प्रति क्यूम मीटर थी। इस बार 19 अक्तूबर को आरएसपीएम 260.93 तथा एसपीएम 318.76 एमजी/मीटर रही। यह पिछले साल की बजाए 20 व 18 प्रतिशत तक घटी है।
आरएसपीएम व एसपीएम बढ़ने से नुकसान
आरएसपीएम व एसपीएम वातावरण में लगातार बढती जा रही है और इसके कारण लोगों को दमा अस्थमा की समस्या घेर रही है। इसी तरह हवा में गैस, बदबू के साथ सस्पेंडेड पर्टीकुलेट मैटर यानि एसपीएम जिसमें धूल, भभक, कोहरा और धुआं होता है। गाड़ियों और फैक्ट्री से निकलने वाला धुंआ, आग से निकलता हुआ धुआं भी एसपीएम का रूप है। इससे गंभीर समस्याएं हो सकती हैं अगर इस माहौल में ज्यादा देर तक सांस लिया जाए तो कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती है।
वर्जन..........
इस बार वातावरण में प्रदूषण व ध्वनि प्रदूषण की मात्रा काफी घटी है। हां सल्फर डाईऑक्साइड थोड़ी मात्रा में बढ़ी है। जरूरी नहीं यह पटाखों के कारण हुआ हो आसपास पराली जलने से भी वातावरण में सल्फर डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ सकती है- विकास हुड्डा, एसडीओ क्षेत्रिय पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड।
बम , पटाखे कम चले अनार, फूलझड़ी , चक्करी ज्यादा चलाए
बम , पटाखे कम चले अनार, फूलझड़ी , चक्करी ज्यादा चलाए
- पटाखों पर पाबंदी से 23 प्रतिशत घटला पोल्यूशन लेवल
- ध्वनि प्रदूषण भी हुआ 20 प्रतिशत तक कम