हिसार। हरियाणा विद्यालय शिक्षा निदेशालय के शिक्षा-दीक्षा पर्यवेक्षण के दौरान कई हैरान करने वाले खुलासा हुए हैं। शिक्षा विभाग के पर्यवेक्षकों का कहना है कि प्रदेश के राजकीय विद्यालयों के 39 प्रतिशत से अधिक प्रधानाचार्य विद्यार्थियों को नहीं पढ़ा रहे हैं। जो प्रधानाचार्य पढ़ा भी रहे हैं तो वे सिर्फ वैकल्पिक विषयों के ही पीरियड ले रहे हैं। निदेशालय के आदेशानुसार प्रधानाचार्यों को प्रत्येक दिन कक्षाओं में जाकर अध्यापक के पठन-पाठन का पर्यवेक्षण करना अनिवार्य है। जिसमें लैसन प्लान देखना, डायरी देखना, विद्यार्थियों की शिक्षण क्षमता की जांच करना शामिल हैं। निदेशालय ने आदेश दिए हैं कि स्कूल मुखिया को निर्धारित किए गए पीरियड लेने अनिवार्य है। अगर कोई प्रधानाचार्य ऐसा नहीं करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा।
इसके साथ ही शिक्षा-दीक्षा पर्यवेक्षण में यह खुलासा हुआ है कि जिन विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड दिए गए हैं उसमें इनका उपयोग कुछ अध्यापकों द्वारा ही किया जा रहा है जबकि अन्य अध्यापक इनका प्रयोग नहीं करते हैं। शिक्षा-दीक्षा पर्यवेक्षण में विभाग के संज्ञान में आया है कि प्रत्येक विद्यालय में पुस्तकालय में काफी मात्रा में पुस्तकें उपलब्ध हैं, लेकिन लाइब्रेरी रजिस्टर के डाटा में जानकारी मिली है कि केवल 67 प्रतिशत विद्यालय ही विद्यार्थियों को पुस्तकें पढ़ने को दे रहे हैं। इसके साथ ही यह भी सामने आया है कि केवल 4 से 5 प्रतिशत स्कूली विद्यार्थी ही अपनी इच्छा से पुस्तकें इश्यू करवा रहे हैं।
शिक्षा-दीक्षा पर्यवेक्षण के दौरान यह रिपोर्ट सामने आई है कि राजकीय विद्यालयों में केमिस्ट्री लैब में केमिकल का अभाव, फिजिक्स लैब में उपकरण व पावर कनेक्शन की कमी है। जियोग्राफी लैब में मानचित्र भी पुराने पाए गए हैं। केवल 67 प्रतिशत लैब ही प्रयोग में लाई जा रही है। बाकी 33 लैब में काम नहीं हो रहा है।
शिक्षा दीक्षा पर्यवेक्षण में पर्यवेक्षकों के संज्ञान में आया है कि पाठ योजना निर्माण का अभाव है। इसमें विषय को रुचिकर तरीके से पढ़ाने के लिए पठन-पाठन सामग्री का उपयोग नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही पर्यवेक्षण में यह सामने आया है कि एबीआरएसी व बीआरपी स्कूलों में अपनी ड्यूूटी का पूरी तरह निर्वहन नहीं कर रहे हैं। पर्यवेक्षकों ने कहना है कि एबीआरसी व बीआरसी केवल खानापूर्ति के लिए विद्यालयों में जा रहे हैं।