अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। लोकसभा चुनाव 2014 में नारनौंद के गांव खेड़ी जालब में दो पक्षों के बीच हुए खूनी संघर्ष में एक व्यक्ति की मौत के केस अदालत 15 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एडीजे परमवीर की अदालत ने इस हत्याकांड में दोषी महिलाओं को भी आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने 15 आरोपियों को 21 जुलाई को दोषी करार दिया था।
अदालत में चले अभियोग के अनुसार पुलिस को दिए गए बयान में खेड़ी जालब वासी मंजीत ने बताया था कि 12 अप्रैल को घटना वाले दिन घर पर था। सुबह करीब साढ़े आठ बजे ताऊ धर्मबीर के घर से शोर-शराबे की आवाजें सुनाई दीं। दौड़ कर ताऊ के घर पहुंचा तो एक दर्जन से अधिक लोग ताऊ के परिवार पर गंडासी, जेली, लाठी, डंडे सहित अन्य हथियारों से हमला कर रहे थे। हमले में ताऊ के बेटे प्रदीप, धर्मबीर, सुभाष, कुलदीप, रोशनी, संतरो पर हमला कर रहे थे। मैंने बीच बचाव का प्रयास किया तो मुझ पर भी हमला कर दिया।
घायलों को नारनौंद अस्पताल लेकर आए। प्रदीप और रोशनी की गंभीर हालत को देखते हुए हिसार रेफर किया। हिसार पहुंचने पर चिकित्सकों ने चचेरे भाई प्रदीप को मृत घोषित कर दिया था। पुलिस ने 15 नामजद सहित कुल 20 लोगों पर हत्या सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
मतदाता की पहचान करने को लेकर हुआ था विवाद
जानकारी के अनुसार प्रदीप के बड़ा भाई महाबीर लोकसभा चुनाव 2014 में कांग्रेस का एजेंट था। उसके सामने कुलदीप इनेलो का समर्थक था। दोनों का पोलिंग बूथ में किसी मतदाता की पहचान करने को लेकर विवाद हो गया था। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच खूनी संघर्ष हो गया था।
इन लोगों को आजीवन कारावास
अदालत ने खेड़ी जालब निवासी राजकुमार, जगदीश, राजेश, रामरतन, बलबीर, सोनू, मनोज उर्फ राजा, संदीप उर्फ दीपा, सोनू, प्रदीप उर्फ काला, जगबीर उर्फ भीम सिंह, विकास, मनजीत, सुखबीर, सुमन, ओमपति को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
राजकुमार उसके तीन बेटों, पत्नी और पुत्रवधू को कैद
राजकुमार के बेटे विकास तथा सोनू को सजा सुनाई गई है। बलबीर की पत्नी ओमपति, इनके तीनों बेटे राजेेश, रामरतन, जगदीश को सजा सुनाई है। रामरतन की पत्नी सुमन को सजा सुनाई है। सुखबीर तथा जगबीर उर्फ भीम सगे भाई हैं।
हरियाणा पुलिस का सिपाही मनजीत भी शामिल
मनजीत हरियाणा पुलिस का सिपाही है। बताया जा रहा है कि फिलहाल वह बहादुरगढ़ के पास उसकी ड्यूटी थी। 21 जुलाई को अदालत ने इन सभी आरोपियों को दोषी करार दिया था। उसी दिन सभी दोषियों को जेल में भेज दिया गया था। जानकारी के अनुसार पुलिस ने जांच में सुखबीर, सुमन, ओमपति, मनजीत ,विकास के नाम केस से हटा दिए थे। इसके बाद पीड़ित परिवार ने हाईकोर्ट में इस्तगासा डाला। इसके इन लोगों के नाम दोबारा केस में शामिल किए।