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किसानों को मार्केटिंग करने पर ही मिलेंगे फसलों के पूरे दाम : डीपी वत्स

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में दो दिवसीय कृषि मेले के उद्घाटन मौके पर मुख्य अतिथि राज्यसभा सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल डीपी वत्स ने कहा कि किसानों को मार्केट पर अपना कब्जा करना होगा। जब तक किसान अपनी फसलों को खुद नहीं बेचेंगे, तब तक उनका पूरा दाम नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि संसाधनों के संरक्षण और रासायनिक खादों का संतुलित उपयोग करने के साथ अपने उत्पाद को सीधे बाजार में बेचना चाहिए, ताकि उनको अपने उत्पाद का सही मूल्य प्राप्त हो सके। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखकर ग्लोबलाइजेशन की ओर बढ़ने और जाति-पाति के भेदभाव से ऊपर उठकर आपसी भाईचारे को कायम रखना होगा।
कृषि विस्तार के उप महानिदेशक डॉ. एके सिंह ने अपने संभाषण में बताया कि सरकार अधिक से अधिक फसलों को एमएसपी के अंतर्गत लाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने गिरते हुए भूजल स्तर पर चिंता जताई कि पहले पानी करीब 300 फुट की गहराई तक प्राप्त हो जाता था, जोकि अब 1000 फुट की गहराई तक पहुंच गया है। इसके लिए उन्होंने पानी के अत्यधिक दोहन पर नियंत्रण करने की अपील की। पराली प्रबंधन संयंत्र खरीदने पर 80 प्रतिशत की सब्सिडी जबकि एकल में इस कार्य के लिए 50 प्रतिशत की अनुदान दी जाएगी। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. केपी सिंह ने किसानों को प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए सरकार द्वारा फंड्स का प्रावधान करने और फार्मज प्रोड्यूस कंपनी को टैक्स मुक्त करने की जानकारी दी। उन्होंने कहा किसान की आय दोगुना होने से अन्य लोगों की आय तीन से चार गुणा हो जाएगी। हमारा हरियाणा नंबर वन था, है और रहेगा।
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कुलपति ने कराया स्टॉल अवलोकन
इस अवसर पर कुलपति की अगुवानी में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट जनों ने मेला स्थल पर लगाई गई स्टॉल एवं किसानों को नवीन तकनीकी की जानकारी देने के लिए लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। पूर्व विस्तार शिक्षा निदेशक एवं मेला संयोजक डॉ. आरएस हुड्डा ने विशिष्ट जनों एवं किसानों का स्वागत किया। कैप्टन भूपेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों के कल्याण के कार्यों हेतु सरकार की ओर से इस विश्वविद्यालय को दिए जाने वाले अनुदान में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। देश में हरित क्रांति लाने में वैज्ञानिकों का अहम योगदान रहा है। नई तकनीकों एवं फसलों की नई किस्मों का प्रयोग करके अपनी आय में इजाफा करना चाहिए। पानी की खपत को कम करने के लिए ड्रिप इरिगेशन और स्प्रिंकलर इरिगेशन आदि विधियां अपनाने का आह्वान किया। हिसार एयरपोर्ट का नवीनीकरण होने जा रहा है, जिससे किसानों के उत्पादों को दूसरे देशों में आसानी से भेजा जा सकेगा।
मेले में पहले दिन पहुंचे 24 हजार किसान
संयुक्त निदेशक विस्तार डॉ. कृष्ण यादव ने बताया कि मेले में मंगलवार को करीब 24 हजार किसानों ने शिरकत की और उन्होंने नए उन्नत बीजों, कृषि विधियों, सिंचाई यंत्रों, कृषि मशीनरी आदि की जानकारी हासिल की। अंत में कृषि कालेज के डीन डॉ. केएस ग्रेवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मेले में विश्वविद्यालय के अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित थे।
प्रगतिशील 19 किसानों को सम्मान
अंबाला से गुरनाम सिंह, बावल (जिला रेवाड़ी) से भरपूर, भिवानी से कैलाश साहू, फरीदाबाद से अशोक कुमार, फतेहाबाद से कुलदीप सिंह, झज्जर से भीम सिंह डागर, जींद से जोगेंद्र सिंह, कैथल से गुलाब सिंह राणा, करनाल से सरदार गुरबाज सिंह, कुरुक्षेत्र से राजकुमार आर्य, मंडकोला (पलवल) से पृथ्वी पाल यादव, महेंद्रगढ़ से गजराज सिंह, पानीपत से राम प्रताप, पिंजौर (पंचकूला) से नरेंद्र सिंह, रोहतक से संदीप मोहन, हिसार से पृथ्वी सिंह, सिरसा से महेंद्र सिंह, सोनीपत से ऋषि पाल, यमुनानगर से जोगेंद्र आदि किसानों को सम्मानित किया गया।
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रबी फसलों का भी निरीक्षण किया
मेले में किसान खरीफ फसलों के बीजों के लिए किसानों में भारी उत्साह देखने को मिला। विश्वविद्यालय की ओर से किसानों की सुविधा के लिए सरकारी बीज एजेंसियों के सहयोग से लगाए गए बीज बिक्री काउंटरों से 11 लाख से भी अधिक के बीज खरीदे। उन्होंने विश्वविद्यालय के अनुसंधान फार्म पर वैज्ञानिकों द्वारा उगाई गई रबी फसलों का भी निरीक्षण किया।
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