अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
जिले के सैकड़ों प्राथमिक शिक्षकों को जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के अड़ियल रवैये के कारण अपने वेतन के बकाया भुगतान से वंचित रखा जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी के अड़ियल रूख पर हरियाणा प्राइमरी टीचर एसोसिएशन ने 22 मार्च को जिला शिक्षा अधिकारी का पुतला फूंकने का फैसला लिया है।
एसोसिएशन के प्रवक्ता विनोद रोहिल्ला ने बताया कि कोर्ट केस टीचरों के हक में आ चुके हैं और एसोसिएशन इस बारे में कई बार जिला शिक्षा अधिकारी बलजीत सहरावत से मिल चुकी है। सारे तथ्य और कागजात दिए जाने के बावजूद भी अधिकारी नहीं मान रहे। अपने विचित्र तरीके से कोई न कोई पेंच अड़ाकर जिला प्रशासन को भी मूर्ख बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये परीक्षा का समय है। इसलिए अधिकारी जान बूझ कर अड़ंगा लगा रहे हैं। एसोसिएशन के राज्य महासचिव बलजीत पूनिया और षजिला प्रधान रणधीर बूरा ने कहा कि शांतिपूर्ण धरने पर बैठे शिक्षकों का समाधान निकालने की बजाय धमकाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि वे 22 मार्च तक और इंतजार करेंगे। 22 मार्च को प्राइमरी की परीक्षाएं समाप्त होंगी, उसी दिन जिला शिक्षा अधिकारी का पुतला दहन किया जाएगा।
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ये है मामला
छठे वेतन आयोग द्वारा जनवरी 2006 से ही प्राइमरी टीचर को प्रारम्भिक वेतन 16290 दे दिया था, परंतु सभी जगह लाभ न दिए जाने का फायदा उठाकर चालाकी करते हुए 18-8-2009 को वित्त विभाग हरियाणा ने एक पत्र द्वारा इसको रोककर प्रारम्भिक वेतन 13500 कर दिया था तथा अधिक लिए वेतन को पर्सनल पे के रूप में समाहित करके बाकी बचे टीचर का रास्ता रोक दिया था। सीनियर टीचर नीलम रानी इस आधार पर माननीय उच्च न्यायालय में चली गई थी कि हमें भी वही लाभ दिया जाए जोकि हमारे जूनियर को दिया गया है। फैसला उनके हक में आया, जिसके बाद सरकार माननीय सर्वोच्च न्यायालय में चली गई जहां उसे हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद हजारों टीचर कोर्ट द्वारा ये लाभ ले गए, परंतु कहीं पूरा और कहीं अधूरा लाभ दिया गया। इसके बाद से मजबूरन टीचर निरंतर कोर्ट में धक्के खाकर अपना समय और पैसा बर्बाद कर रहे हैं।