सुरेंद्र दलाल
हिसार। जिले के अस्पतालों में 30 प्रतिशत से अधिक मरीज दूसरे प्रदेशों और एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी परिक्षेत्र) के हैं। इनमें ज्यादातर मरीज वेंटिलेटर पर हैं। प्रशासन की ओर से ऐसे लोगों की सूची बनाई जा रही है। पूरी तरह से फुल हो रहे कोविड अस्पतालों में नए मरीजों की भर्ती रोक दी गई है। ऑक्सीजन, वेंटिलेटर न होने की बात कहकर नए मरीजों को भर्ती नहीं किया जा रहा। जिले में दूसरे प्रदेशों और एनसीआर के करीब 320 मरीज हैं।
हिसार की बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का पूरी तरह लाभ यहां के लोगों को नहीं मिल पा रही है। दिल्ली, गुुुरुग्राम, फरीदाबाद, नोयडा, गाजियाबाद के मरीज रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से यहां के अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं। निजी अस्पतालों में भारी भरकम बिल चुका रहे हैं। पंजाब, राजस्थान के कुछ मरीज भी हिसार के अस्पतालों में भर्ती हैं। जिला प्रशासन को भी इस बारे में जानकारी है। अब अस्पतालों में बेड पूरी तरह से भर जाने के बाद प्रशासन अनौपचारिक तौर पर निजी अस्पतालों पर दूसरे प्रदेशों, एनसीआर के मरीज न लेने का दबाव बना रहा है। निजी अस्पतालों के ऑक्सीजन के कोटे में भी कटौती कर दी गई है। अस्पताल प्रबंधकों को ऑक्सीजन की उपलब्धता के हिसाब से ही नए मरीज भर्ती करने के निर्देश दिए गए हैं।
हेल्पलाइन पर आ रहे 500 से अधिक फोन
हिसार के कई अस्पतालों को अभी कोविड अस्पताल नहीं बनाया गया है। फिलहाल जिले में कुल 31 अस्पतालों को कोविड अस्पताल बनाया गया है। जिसमें मरीजों को भर्ती किया गया है। इन अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने एक हेल्प लाइन नंबर भी जारी किया हुआ है। इन हेल्पलाइन नंबर पर रोजाना 500 से अधिक फोन आ रहे हैं।
वेंटिलेटर के लिए चुका रहे भारी कीमत
जिले में 1050 मरीज कोविड अस्पतालों में भर्ती हैं। जिनमें करीब 320 मरीज दूसरे प्रदेश या एनसीआर के रहने वाले हैं। वेंटिलेटर पर पहुंच चुके मरीज एक दिन के लिए अस्पताल को 25 से 45 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पैसा चुका रहे हैं।
दो मरने वाले थे बाहरी
सोनी बर्न अस्पताल में सोमवार को पांच लोगों की मौत हुई थी। जिनमें एक मरीज दिल्ली और दूसरा मरीज पंजाब का था। ये मरीज पिछले 15 दिन से अस्पताल में भर्ती थे। दोनों ही मरीज वेंटिलेटर पर ऑक्सीजन की सहायता पर रखे गए थे।
हमारी प्राथमिकता मरीजों को बचाना
जिले में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होने के कारण यहां दूर दराज से भी मरीज आ रहे हैं। ऐसे मरीजों की निश्चित संख्या देना फिलहाल संभव नहीं होगा। हमारी प्राथमिकता मरीजों को बचाने की है। अस्पतालों में किसी तरह की लापरवाही न हो इसके निर्देश दिए गए हैं।
-डॉ. प्रियंका सोनी, डीसी, हिसार।