शारदीय नवरात्र 15 अक्तूबर से शुरू होने जा रहे हैं। नवरात्र में 30 साल बाद तीन अद्भुत दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। बुधाआदित्य योग, शश राजयोग और भद्र राजयोग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिषाचार्य आचार्य राममेहर शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष गणना के अनुसार नवरात्रि के पहले दिन सूर्य और बुध कन्या राशि में विराजमान रहेंगे। ऐसे में यहां सूर्य बुध की युति से बुधाआदित्य योग का निर्माण हो रहा है। इस दिन वैद्युती योग का भी खास संयोग बन रहा है।
ज्योतिष शास्त्र में बुद्ध आदित्य योग को बहुत शुभ माना गया है। ऐसे में शारदीय नवरात्रि के पहले दिन इस योग का पूजा पाठ की दृष्टि से बहुत खास और शुभ माना गया है। आचार्य राममेहर शास्त्री ने बताया कि सोमवार को शनि देव धनिष्ठान नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश करेंगे। साथ ही 17 अक्तूबर को सूर्य का तुला राशि में गोचर होगा, जबकि 18 अक्तूबर को बुध ग्रह भी तुला राशि में प्रवेश करेंगे।
वहीं, नवरात्र में सोना- चांदी, गाड़ी खरीदना शुभ होता है। इस बार नवरात्र पूरे 9 दिन होंगे। वैसे तो नवरात्र में किसी भी समय कलश की स्थापना कर सकते हैं। मुहूर्त सुबह 7 बजकर 13 मिनट से सुबह 9 बजकर 40 मिनट तक तथा 9 बजकर 40 मिनट से 10 बजकर 40 मिनट तक, उसके बाद अभिजीत शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 36 मिनट तक है।
इस दिन होगी इन देवी की पूजा
प्रथम दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कुष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौंवे दिन सिद्धिदात्री देवी की पूजा होगी।
हाथी पर सवार होकर आ रही मां दुर्गा
नवरात्र में अखंड ज्योत जलाने का काफी महत्व होता है। शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही है। नवरात्र की शुरुआत जिस दिन से होती है, मां दुर्गा की सवारी भी उसी दिन के आधार पर होती है। हाथी को ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। नवरात्र के दिन सुबह उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। काले और नीले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। पूजा सामग्री में रोली, मोली, चावल, लौंग, इलायची, पानी वाला नारियल, पान का पत्ता, कपूर, हल्दी की गांठ, चांदी का सिक्का, मां की चुनरी, आम के पत्ते होने चाहिए।