फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hisar News: 25 करोड़ की पेयजल योजना हॉटलाइन के अभाव में अटकी, छह गांवों में गहराया जल संकट

विज्ञापन
गांव गोरछी का खाली पड़ा जलघर।
विज्ञापन
बालसमंद/हिसार। राजस्थान सीमा से सटे छह गांवों की करीब 40 हजार आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 25 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई योजना हॉटलाइन बिजली कनेक्शन के अभाव में पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रही है। करीब तीन साल पहले चौधरी माइनर के सीसवाला हेड पर बने पंप हाउस को आज तक अलग बिजली फीडर से नहीं जोड़ा गया।
विज्ञापन

घरेलू फीडर से बिजली मिलने और बार-बार कटौती के कारण जलघर पूरे नहीं भर पा रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द हॉटलाइन कनेक्शन नहीं दिया गया तो जलघर पर ताला लगाकर धरना शुरू किया जाएगा।
राजस्थान सीमा से सटे क्षेत्र के गांव वर्षों से पेयजल संकट झेल रहे हैं। इसे लेकर वर्ष 2018 में ग्रामीणों ने करीब तीन महीने तक आंदोलन किया था। इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल की स्वीकृति से किरतान, सरसाना, बासड़ा, गोरछी, बालसमंद और बुड़ाक के जलघरों तक चौधरी माइनर से करीब 30 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई। वर्ष 2021 में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना पूरी हुई। इसके बाद सिंचाई विभाग ने पुराने मोघा कनेक्शन बंद कर दिए और सीसवाला हेड स्थित पंप हाउस से जलापूर्ति शुरू की गई।
विज्ञापन

पंप हाउस में उच्च क्षमता की मोटरें लगाई गई हैं लेकिन इन्हें किरतान के घरेलू फीडर से बिजली दी जा रही है जहां 18 से 20 घंटे ही आपूर्ति मिलती है। बिजली का कुछ मिनट का कट लगते ही मोटर बंद हो जाती है और दोबारा चालू होने में करीब आधा घंटा लग जाता है। इससे जलघरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा।
ग्रामीणों का कहना है कि नहर बंद होने के पांच दिन बाद ही जलघरों के टैंक खाली होने लगे हैं। पंप हाउस से जुड़े सात जलघरों के माध्यम से छह गांवों की करीब 40 हजार आबादी प्रभावित हो रही है।
बिजली कटौती के कारण जलघरों के टैंक नहीं भर पा रहे हैं। नहर बंद होने के पांच दिन बाद ही पानी की किल्लत शुरू हो गई। छह गांवों के सात जलघर प्रभावित हैं।
- विनोद जांगड़ा, ग्रामीण, किरतान।
गोरछी के जलघर के तीन टैंकों में से एक सूख चुका है। सिंचाई विभाग ने अतिरिक्त पानी छोड़ा, लेकिन बिजली बाधित रहने से जनस्वास्थ्य विभाग टैंक नहीं भर सका। कटौती के दौरान जनरेटर भी नहीं चलाया गया।
- अनिल गोरछी, किसान नेता।
कुछ लाख रुपये बचाने के चक्कर में 25 करोड़ रुपये की परियोजना प्रभावित हो रही है। अलग हॉटलाइन होती तो मोटर लगातार चलती और गांवों को पर्याप्त पानी मिलता।
- सुरेंद्र आर्य, ग्रामीण, धीरनवास।
किरतान फीडर करीब 40 किलोमीटर लंबा है इसलिए इसमें बार-बार फाल्ट आते हैं। पंप हाउस को भिवानी रोहिला पावर हाउस से सीधी बिजली लाइन मिलनी चाहिए तभी समस्या का स्थायी समाधान होगा।
- प्रभु राम ढाका, ग्रामीण, बालसमंद
परियोजना के समय अलग फीडर का प्रयास किया गया था लेकिन डीएचबीवीएन से स्वीकृति नहीं मिली। अब समस्या को देखते हुए मामला दोबारा मुख्यालय भेजा जाएगा। निजी कंपनी से हॉटलाइन कनेक्शन की संभावना भी तलाश रहे हैं।
विज्ञापन

- कपिल कुमार, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें