अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। रोडवेज की हड़ताल 11वें दिन भी जारी रही। रोडवेज की हड़ताल के बाद से लगातार अंडरग्राउंड चल रहे रोडवेज कर्मचारी नेता राजपाल नैन और दलबीर किरमारा शुक्रवार को कर्मचारी संगठनों द्वारा लघु सचिवालय में किए जा रहे अनशन स्थल पर पहुंचे। दोनों ने मंच पर आकर बोला कि प्रदेश सरकार कर्मचारी नेताओं को रूट परमिट में हिस्सा देकर खरीदना चाहती थी। मगर सरकार की कोशिशों को कर्मचारी नेताओं ने नाकाम कर दिया। प्रदेश सरकार को चेताया गया है कि रोडवेज कर्मचारी विभाग के निजीकरण को रोकने के लिए हड़ताल कर रहे हैं।
रोडवेज और आरटीए प्रशासन मिलकर रोजाना 80 से 90 बसों का संचालन करवा रहे हैं, मगर आठ हजार से अधिक यात्रियों के सामने बसों की संख्या पर्याप्त नहीं है। नतीजतन, स्टूडेंट्स को बस की छतों पर जगह मिलती है तो बुजुर्गों को भी खड़े रहकर सफर काटना पड़ता है। हालात ऐसे हैं कि छात्राओं को भी खिड़कियों पर खड़े रहकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ता है। शुक्रवार को भी परिवहन समिति की 42 और रोडवेज की 38 बसों का संचालन किया जा सका। रोडवेज कर्मचारी यूनियनों की ओर से प्रदेश सरकार द्वारा 720 प्राइवेट बसों को किलोमीटर स्कीम के तहत चलाने का विरोध करते हुए 16 अक्तूबर से हड़ताल की जा रही है। 11 दिनों में रोडवेज को दो करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
प्रदेश सरकार के सारे नारे बस स्टैंड पर फेल
प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा दिए गए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, बुजुर्गों के सम्मान, सुहाना सफर और स्वच्छता अभियान जैसे नारे बस स्टैंड पर फेल नजर आ रहे हैं। प्राइवेट बस हो या रोडवेज हर जगह भारी भीड़ है। 50 सीटर बसों में 100 से 150 सवारियां सफर करती हैं। ऐसे में छात्राओं को असुरक्षा का माहौल मिलता है। वहीं मात्र 80 से 90 बसें चलने से छात्र-छात्राएं समय पर कॉलेज या यूनिवर्सिटी नहीं पहुंच पा रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई भी बाधित हो रही है। अधिकतर विद्यार्थी पहले पीरियड के समय तक शिक्षण संस्थान नहीं पहुंच पाते हैं।
11वें दिन बूथ पर लगीं प्राइवेट स्कूल की बस
प्रदेश सरकार की ओर से आदेशों के बावजूद भी हिसार डिपो में प्राइवेट स्कूलों की बसों को रूटों पर चलाने की नौबत नहीं आई थी। मगर शुक्रवार को तलवंडी राणा स्थित सेंट फ्रांसिस जेवियर स्कूल की बस को मंगाली-स्याहड़वा रूट पर चलाया गया। इसके अलावा कुछ अन्य स्कूलों की बसों को भी रूटों पर भेजा गया।
ये बोले यात्री-
मैं हिसार प्रतिदिन वीएस की कोचिंग लेने आता हूं। समय पर बस न मिलने के कारण कक्षा में देरी से पहुंच रहे हैं। देरी से पहुंचने पर हमारी पढ़ाई बाधित हो रही है। न तो समय पर कोचिंग सेंटर में पहुंच पाते हैं और न ही समय पर घर पहुंच पाते हैं।
-अशोक, छात्र, गांव खैरी
कम बसें चलने केे कारण बसों में काफी भीड़ रहती है। लड़कियों को बहुत ज्यादा परेशानी होती है। मैं वीएस की कोचिंग ले रहा हूं। बस हड़ताल के कारण सुबह क्लास में समय पर नहीं पहुंच पाता हूं। हड़ताल के खत्म होने पर ही राहत मिल पाएगी।
-पंकज, छात्र, गांव पाबड़ा।
बसों के नहीं चलने से बहुत समस्या हो रही है। बसों में भीड़ ज्यादा होने के कारण पैर रखने की भी जगह नहीं रहती। स्कूल व कॉलेज जाने वाली लड़कियों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। सवारियां बहुत परेशान हो रही हैं। सरकार को हड़ताल खत्म करवानी चाहिए। -राजेंद्र, यात्री, आदमपुर।
बैरा नी या हड़ताल कद खत्म होवैगी। बुढ़यां की तो जमा बिरान माट्टी हो री सै। फतेहाबाद जाना सै, दो घंटे होगे ईब तक बस कोनी आई। जो भी बस आवै सै, वा पहलयां ए सवारियां की भरी आवै सै। सीट मिलण का कोए चांस कोन्या लागदा।
-राधेश्याम, यात्री, फतेहाबाद।