वैराग्य ही कराता है परमात्मा के दर्शन : स्वामी सच्चिदानंद
अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। स्वामी दीप्तानंद अवधूत आश्रम खरड़-अलीपुर में सतगुरु बंदी छोड़ हरिहरानंद महाराज के समाधि स्थल पर वीरवार को ग्रंथ साहिब की अमृतमय वाणी का संपूर्ण पाठ संतों व साध संगत की उपस्थिति में स्वामी सच्चिदानंद महाराज द्वारा विधिवत संपन्न किया गया।
इस अवसर पर सत्संग में अपने शब्दों द्वारा सतगुरु की महिमा का गुणगान किया गया और परमपिता परमात्मा का स्मरण किया गया। प्राध्यापिका भगत पूनम रानी ने द्रोपदी प्रकरण के माध्यम से प्रभु की महिमा का व्याख्यान किया। उन्होंने कहा कि परमात्मा हमारी सहायता तभी करते हैं जब हम उन्हें पूरी तन्मयता से बुलाते हैं। संसार के सभी प्रिय मित्र जब हम से मुंह मोड़ लेते हैं, तब हमें परमात्मा के प्रति सच्चा वैराग्य उत्पन्न होता है और यही वैराग्य हमें परमात्मा के दर्शन करवाता है। इसी प्रसंग में विस्तार देते हुए स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज ने बताया कि जब हमारा सांसारिक वस्तुओं व रिश्ते-नातों से मुंह टूट जाता है तभी प्रभु भक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। ऐसी करी गुरुदेव दया, मेरा मोह का बंधन तोड़ दिया। मोह का बंधन सतगुरु की कृपा के बगैर नहीं छूट सकता। इसलिए सभी वेद शास्त्र वाणी ग्रंथ यही बताते हैं की मोक्ष के लिए गुरु कृपा केवलं। आश्रम प्रवक्ता बलराज सिंह सहरावत ने बताया कि 28 जून को कबीर जयंती पर सुबह दस बजे से दो बजे तक सत्संग व भंडारे का आयोजन किया जाएगा।