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मंत्री पिछले रास्ते से जाने पर गुस्साए लोगों ने सचिवालय का मेन गेट किया बंद, कई घंटे की नारेबाजी, प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
रावलवास खुर्द गांव के वेदप्रकाश की हत्या के मामले में लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे मृतक के परिजनों और अन्य लोगों ने सोमवार दोपहर को लघु सचिवालय के मेन गेट को घेर लिया और डेरा डालकर बैठ गए। वे लघु सचिवालय में मीटिंग लेने आए जन स्वास्थ्य मंत्री बनवारी लाल से मिलने का इंतजार कर रहे थे। मंत्री के पिछले रास्ते से जाने की भनक लगने के बाद वे आक्रोशित हो गए। कुछ लोग गेट कूदकर अंदर जाने का प्रयास करने लगे तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक लिया। मौके पर पहुंचे प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों के साथ प्रदर्शनकारियों की नोक-झोंक हुई। एक-एक करके प्रशासन के तीन अधिकारियों द्वारा आश्वासन देने के बावजूद प्रदर्शन कर रहे लोगों ने उनकी एक न सुनी और वे डीसी को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, वे मेन गेट के आगे से नहीं उठेंगे। वहीं मेन गेट बंद होने के कारण लघु सचिवालय में बैठे अधिकारियों और जजों को भी दूसरे रास्ते से जाना पड़ा। स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात था। प्रदर्शनकारियों ने एक बजे से देर शाम तक मेन गेट बंद रखा। तक तब सचिवालय के दफ्तर खाली हो चुके थे और प्रदर्शनकारियों ने गेट नहीं खोला था।
रावलवास खुर्द गांव में 17 अप्रैल को वेदप्रकाश की झगड़े के बाद मौत हो गई थी। अगले दिन परिजन आरोपियों की गिरफ्तारी, मृतक के परिजनों को आर्थिक मदद और सरकारी नौकरी की मांग को लेकर शव को लेकर लघु सचिवालय के गेट के बाहर पहुंच गए थे। उन्होंने शव सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया था। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने आश्वासन देने के बाद परिजन शव लेकर चले गए थे। लेकिन करीब दस दिन तक आरोपियों की गिरफ्तारी और मांगों को पूरा न होने के चलते परिजन और अन्य लोग लघु सचिवालय के बाहर टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए थे। सोमवार को लघु सचिवालय के बाहर धरने पर मृतक के परिजनों के पक्ष में काफी संख्या में लोग पहुंच गए।
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तीन अधिकारियों के समझाने पर भी नहीं माने
प्रदर्शनकारियों द्वारा मेन गेट के बाहर प्रदर्शन करने का पता चलने पर पहले सीटीएम शालिनी चेतल मौके पर पहुंचीं, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनकी एक न सुनी। उसके बाद एसडीएम परमजीत चहल और तहसीलदार विनय चौधरी के साथ डीएसपी मोहम्मद जमाल, सिद्धार्थ ढांडा मौके पर पहुंचे। उनकी भी नहीं सुनी। उनकी मांग थी कि डीसी मौके पर आएं और बात करें।
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ये हैं आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी मनोज अठवाल ने बताया कि दो हत्या आरोपी गिरफ्तार हुए हैं, बाकी आरोपी तुरंत गिरफ्तार हों। पीड़ित परिवार को धमकी मिल रही हैं, उनको असलाह का लाइसेंस दिया जाए, मृतक के परिवार को 10 लाख की आर्थिक सहायता और एक सरकारी नौकरी दी जाए। अठवाल ने कहा कि मांगें मानी जाने तक धरना जारी रहेगा।

हत्या के मामले में रावलवास के रामकुमार और सूरतपुरा के सुरेंद्र को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
-संदीप धनखड़, इंचार्ज बालसमंद चौकी
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