अमर उजाला ब्यूरो
उकलाना मंडी।
विधानसभा में गांव चमारखेड़ा का 125 वर्ष पुराना नाम का का सौंदर्य बढ़ाते हुए सुंदरखेड़ा करने के एलान का गांव में जोरदार स्वागत किया गया। गांव के मुख्यद्वार पर एकत्रित बच्चों, बुजुर्गों, युवाओं ने लड्डू बांटकर खुशियां मनाई, वहीं महिलाओं ने रसोई में हलवे का पकवान बनाया। ग्रामीणों में राज्य सरकार के इस फैसले की प्रतिक्रिया
एक सी रही कि अब कोई हमें मजाक में चमारखेड़ा वाला नहीं कहेगा। उधर गांव में विवाहित महिलाओं का यह कहना था कि अब हम मायके में गर्व से कह सकेंगी कि मेरी शादी सुंदरखेड़ा में हुई हूं। बताते हैं कि सवा सौ वर्ष पहले इस गांव का अस्तित्व बना तब इस भूखंड पर एक जूतों की मरम्मत करने वाला श्रमिक रहता था और वही एक अंग्रेज डाक विभाग का सरकारी श्रमिक प्रतिदिन हिसार से भूना कार्यालय डाक लाने-ले जाने का काम करता था। ये दोनों चमार जाति से थे और इनकी मित्रता के बाद इन दोनों ने यह खेड़ा बसाया जिसका नामकरण चमारखेड़ा के रूप में हो गया था। मगर अब बदलते परिवेश में समाज शब्द का एक अलग ही अर्थ हो गया, जिस कारण सामाजिक तौर पर नाम बदलने की बाते उठने लगी और सरकार ने भी इस भावनाओं का मर्म समझा और मांग के हक में निर्णय दे दिया।
गांव में सरकार के फैसले की खुशी में एक बैठक की गई जिसकी अध्यक्षता सरपंच अमिता देवी ने की। इसके अलावा जिला परिषद की वाईस चेयरमैन मीना शर्मा ने इस फैसले का स्वागत किया। बैठक में रामस्वरूप धायल, हरिचंद शर्मा पंच, ओमप्रकाश शर्मा, बलबीर छिरंग, सोहनलाल, अनुराग, अजय, सुनील भोला, कृष्ण महला, विक्रम सहारण, नवीन शर्मा, सतपाल बसंत, अजय, देवेंद्र ने भाग लिया और एक दूसरे को बधाइयां दी। महिला वर्ग से बिजेनो देवी, पिंकी, सावित्री, आशारानी, संतोष व गुड्डी देवी आदि ने भी अलग-अलग वार्डो में लड्डू बांटे।
अब हमें कोई मजाक में चमारखेड़ा वाला नहीं कहेगा
फोटो नंबर 2 से 6 व 31 नंबर सहित---------
चमारखेड़ा से सुंदरखेड़ा बनने पर ग्रामीणों ने बांटे लड्डू, घरों में बनवाए पकवान