चरखी दादरी। गांव समसपुर स्थित जिला स्तरीय खेल स्टेडियम में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद खेल सुविधाएं अधूरी हैं। छह साल से बन रहे स्टेडियम में मैदानों के लिए मिट्टी का भरत, पानी के टैंक, सुरक्षा के इंतजाम और मल्टीपर्पज हॉल का काम पूरा नहीं हो पाया है। लंबित कार्यों को पूरा करवाने के लिए लोक निर्माण विभाग ने 52 करोड़ रुपये का संशोधित एस्टीमेट मंजूरी के लिए भेजा है। स्वीकृति मिलने के बाद ही स्टेडियम में शेष निर्माण कार्य पूरे होने और खिलाड़ियों को अभ्यास की बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है।
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, स्टेडियम का निर्माण 2020 में शुरू हुआ था। स्टेडियम के निर्माण पर पहले सरकार की ओर से करीब 20.79 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इनमें इलेक्ट्रिकल विंग ने बिजली संबंधी कार्यों पर 7.30 करोड़ रुपये लगाए, जबकि सिविल कार्यों पर 10.84 करोड़ रुपये खर्च किए गए। शेष अन्य कार्यों पर खर्च हुए।
इसके बावजूद खेल परिसर को खिलाड़ियों के नियमित अभ्यास के लिए पूरी तरह तैयार नहीं किया जा सका। अब बचे हुए कार्यों को पूरा करवाने के लिए कुल 52 करोड़ रुपये का संशोधित एस्टीमेट भेजा गया है। स्टेडियम में फिलहाल खेल मैदान तैयार नहीं हैं। फुटबाल, खो-खो, कुश्ती, कबड्डी और हॉकी, स्विमिंग पुल के लिए अलग-अलग मैदान विकसित किए जाने हैं। इसके लिए सबसे पहले जमीन पर मिट्टी का भरत करवाना होगा। इसके बाद खेलों की जरूरत के अनुसार मैदान तैयार किए जा सकेंगे। इन सुविधाओं के अभाव में खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए दूसरे स्थानों या अपने स्तर पर उपलब्ध व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
जिला स्तरीय स्टेडियम होने के कारण यहां जिले के विभिन्न गांवों से आने वाले खिलाड़ियों को प्रशिक्षण की बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। मैदान विकसित होने से उन्हें नियमित अभ्यास करने, अपनी तकनीक सुधारने और प्रतियोगिताओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। फिलहाल अधूरे निर्माण के कारण यह उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है।
नाम पट्टिका से लेकर पानी के इंतजाम तक अधूरे
स्टेडियम में खेल सुविधाओं के साथ बुनियादी व्यवस्थाएं भी अधूरी हैं। पानी की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त टैंकों की व्यवस्था भी नहीं है। खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान पानी उपलब्ध करवाने के लिए जरूरी इंतजाम करना आवश्यक है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्टेडियम की चारदीवारी पर केवल लोहे के एंगल लगाए गए हैं, जबकि परिसर की सुरक्षा के लिए कांटेदार तार की बाड़बंदी होनी चाहिए। इससे अनधिकृत प्रवेश रोकने और परिसर को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। परिसर की पहचान के लिए अब तक नाम पट्टिका तक नहीं लगाई गई है।
स्थानीय लोगों ने जल्द सुविधाएं विकसित करने की उठाई मांग
खिलाड़ी दिनेश कुमार ने कहा कि स्टेडियम में सुविधाएं न होने के कारण उन्हें अभ्यास के लिए दूर जाना पड़ता है। स्थानीय निवासी भूपेंद्र फोगाट, पूर्व सरपंच सुरेंद्र सिंह सहित अन्य लोगों ने कहा कि स्टेडियम में अब तक जरूरी सुविधाएं विकसित नहीं हो पाई हैं। खेल मैदानों का निर्माण नहीं होने से युवाओं को नियमित अभ्यास के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने मांग की कि मिट्टी का भरत करवाने के बाद सभी निर्धारित खेलों के मैदान तैयार किए जाएं। पानी के पर्याप्त टैंक, नाम पट्टिका और चारदीवारी पर कांटेदार तार लगाने का काम भी पूरा किया जाए।
उनका कहना है कि स्टेडियम शुरू होने से समसपुर के साथ आसपास के गांवों के खिलाड़ियों को भी लाभ मिलेगा। स्थानीय स्तर पर अभ्यास की बेहतर सुविधा मिलने से युवाओं को खेल प्रतियोगिताओं की तैयारी करने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। इससे क्षेत्र में खेल गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
मंजूरी के बाद पूरे होंगे लंबित कार्य
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों का कहना है कि 52 करोड़ रुपये का संशोधित एस्टीमेट मंजूरी के लिए भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद स्टेडियम में बचे हुए निर्माण कार्य पूरे करवाए जा सकेंगे। इसके बाद ही खेल मैदानों और अन्य जरूरी सुविधाओं को विकसित कर परिसर को खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए उपयोगी बनाया जा सकेगा।
वर्सन:
गांव समसपुर स्थित जिला स्तरीय खेल स्टेडियम के बचे हुए कार्यों को पूरा करवाने के लिए विभाग की ओर से 52 करोड़ रुपये का रिवाइज एस्टीमेट भेजा गया है। उम्मीद है जल्दी ही एस्टीमेट की मंजूरी मिल जाएगी, इसके बाद स्टेडियम का बचा हुआ कार्य पूरा हो सकेगा।
प्रेमसिंह, एसडीओ लोक निर्माण विभाग