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बच्चियों की मौत के बाद हरकत में आया स्वास्थ्य विभाग

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार। शहर में एक ही दिन में डेंगू से तीन बच्चियों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग भी हरकत में आ गया। आनन-फानन में मलेरिया विभाग की टीम को संदिग्ध स्थानों पर भेज दिया गया। दवाई का छिड़काव करवाया गया और फॉगिंग भी कराई गई। टीम के सदस्य भी संदिग्ध स्थानों पर मकानों की छतों पर चढ़कर टंकियों में भी झांकते नजर आए।
भले स्वास्थ्य विभाग सरकारी अस्पताल में डेंगू जांच के लिए सैंपल न भेजे जाने की बात कह रहा हो, लेकिन तीन बच्चियों की डेंगू से मौतों की चर्चा शहर में फैलते ही प्रशासन के हाथ-पांव फूले नजर आए। डेंगू से मौत होने की खबर मिलते ही प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। मलेरिया रोकथाम विभाग की टीम डॉ. सुखबीर श्योराण के नेतृत्व में गंतव्यों की ओर रवाना हो गई। टीम ने जिंदल कॉलोनी, विश्वास स्कूल, सिरसा रोड, अर्बन एस्टेट, उत्तम नगर, तेजा मार्केट एरिया, मिलगेट, सुंदर नगर कॉलोनी आदि में चेकिंग अभियान शुरू किया गया। हेल्थ डिपार्टमेंट की टीम ने इन एरिया में सैंपल लिए व लारवा रोकथाम के लिए फॉगिंग करवाई। इसके अलावा इन एरिया में पानी वाली जगहों पर दवाई का छिड़काव भी किया।
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टंकियों पर चढ़े, टायर जांचे
टीम ने विश्वास स्कूल की छत पर चढ़कर पानी की टंकियों की भी जांच की। तीन बच्चियों की मौत से सकते में आए प्रशासन ने स्कूल में न केवल पानी की टंकियां जांचीं, बल्कि स्कूल के अंदर बोतल में लगे मनी प्लांट तक के पानी की जांच कर ली। साथ ही स्कूल परिसर में पड़े टायरों को भी उलट-पलट कर देख लिया। हालांकि डॉ. सुखबीर श्योराण ने कहीं से भी लारवा नहीं मिलने की पुष्टि की।
बच्चों ने की थी मच्छर होने की शिकायत
मृतक छात्रा के पिता राजेश्वर ने कहा कि बच्चों ने स्कूल मेें ज्यादा मच्छर होने की शिकायत स्कूल प्रबंधन से की थी। इसके बाद भी स्कूल प्रबंधन की ओर से इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब भी पिछले कई दिनों से बच्चे घर आकर बोल रहे थे कि कक्षा में उनको मच्छरों से काफी परेशानी होती है। नाम न छापने की शर्त पर एक अभिभावक ने बताया कि उनके बच्चे इसी स्कूल में पढ़ते हैं। शुक्रवार को स्कूल जाने के बाद कुछ देर में ही बच्चे वापस घर आ गए। जब उन्होंने इसकी वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि स्कूल में प्रार्थना सभा में बताया गया कि स्कूल की दो छात्राओं की डेंगू के कारण मौत हो गई है, इसलिए छुट्टी की जा रही है। इसके बाद स्कूल के गेट बंद कर दिए गए।
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निजी अस्पतालों ने क्यों नहीं भेजी रिपोर्ट
यहां निजी अस्पतालों की ओर से भी लापरवाही सामने आ रही है। तीन छात्राओं को डेंगू था और उनका दो निजी अस्पतालों में इलाज भी कराया गया। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग और मलेरिया विंग को कोई सूचना नहीं दी गई, जबकि सरकारी नियम हैं कि मलेरिया या डेंगू का मरीज आते ही सबसे पहले सूचना मलेरिया विंग को देनी है।
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