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दवा घोटाला ---

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
सांसद दुष्यंत चौटाला ने आरटीआई से मिले रिकॉर्ड के आधार पर कहा कि हिसार की जिन कंपनियों से करोड़ों की दवा खरीद हुई, वह कंपनी बार-बार फर्जी पता देती रही। सालासर नाम की कंपनी ने दवा की आपूर्ति करने का अपना पता हुडा सेक्टर-13 के 84 एससीएफ का बताया। हुडा के इस सेक्टर में यह एससीएफ का नंबर कभी अलॉट ही नहीं हुआ। यहां केवल 12 एससीएफ ही बने हैं।
जीके ट्रेडिंग कंपनी ने सेक्टर-13 के शॉप कम बूथ नंबर 92 का पता दिया था। यहां पिछले एक दशक से नाई की दुकान चल रही है। इस कंपनी ने पहले डोगरान मोहल्ले का पता दिया हुआ था। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार दवा खरीद में ई-टेंडर शुरू होने से पहले अप्रैल 2014 से आगे का रिकॉर्ड लिया है। नागरिक अस्पताल में केवल दो कंपनियों को ही दवा खरीद के 90 प्रतिशत ऑर्डर मिले। दवा खरीद के लिए टेंडर को अपनाने की बजाय कोटेशन को प्राथमिकता दी गई। अधिकतर बिल 90 से 99 हजार के बीच बनाए गए। जो दवा फतेहाबाद में टेंडर में 2.20 रुपये में मिल रही थी, उसी समय वही दवा हिसार में 5.50 रुपये में खरीदी गई।
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कंपनी मालिक नकली सिक्कों के मामले में जेल में बंद
जिस कंपनी पर बोगस होने का आरोप लगाया गया है, वह हिसार की कंपनी है। कंपनी मालिक नकली सिक्कों के मामले में जेल में बंद है। आरोप है कि कंपनी को अवैध तौर पर हिसार में नियुक्त रहे चीफ फार्मासिस्ट ही अंजाम देते रहे। इसमें पूर्व सीएमओ की मिलीभगत से दवाइयों की खरीद की गई।
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रिकॉर्ड लेकर पंचकूला पहुंचे
हिसार। नागरिक अस्पतालों में दवा खरीदने मामले में तीन सौ करोड़ रुपये का आरोप लगने के बाद नागरिक अस्पताल के चीफ फार्मासिस्ट और एक अन्य फार्मासिस्ट को पंचकूला तलब किया गया। दोनों फार्मासिस्ट सोमवार सुबह दवाइयों की खरीद पिछले पांच साल का रिकॉर्ड लेकर पंचकूला के लिए पहुंचे। इसमें वर्ष 2014 से लेकर वर्ष 2015 के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
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