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दूसरे दिन भी नहर को नहीं कर सके दुरुस्त, नहर में कट्टे डाल बहाव को रोका

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अमर उजाला ब्यूरो
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हिसार।
खरकड़ी के पास सुलखनी की तरफ टूटी बालसमंद सब ब्रांच नहर को दूसरे दिन शुक्रवार को दुरुस्त नहीं किया जा सका। सिंचाई विभाग के एक्सईएन राजेश कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। नहर के बीच मिट्टी के कट्टे डालकर पानी के बहाव को रोका गया।
सुलखनी की तरफ टूटी नहर की 100 फीट चौड़ी दरार को दूसरे दिन भी बाधा नहीं जा सका। नहर में मिट्टी के कट्टों को डालकर पानी के बहाव को जरूर रोकने में सिंचाई विभाग को कामयाबी हासिल हुई। नहर को पाटने को लेकर अभी तक किसान अड़े हुए हैं। टूटी नहर को पाटने को लेकर आए एक्सईएन राजेश कुमार जब गाड़ी से नहीं उतरे तो किसानों ने हंगामा कर दिया। इसके बाद साहब गाड़ी से उतरे तो किसान शांत हो गए। किसानों ने अपनी समस्या बताई। घिराय गांव के युवा पूर्व सरपंच प्रतिनिधि नरेंद्र बूरा, सुशील बूरा इत्यादि ने बताया कि नहर ही कंडम है तो कैसे टूटने से रोका जा सकेगा। नहर की सफाई व्यवस्था के नाम पर और मरम्मत कार्य पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च करवाती है। महकमा कुछ भी नहीं करवाता। एक बार नहर टूटने पर सैकड़ों किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान होता है। किसान बोले, हम तो उजड़ लिए। सिंचाई विभाग हमें अब तक मुआवजा भी नहीं दिला सका। सुलखनी-खरकड़ी मार्ग को उखाड़ दिया, ताकि पानी को आगे की ओर निकालकर फसल को बचाया जा सके। किसानों ने ट्यूबवेल के पंपसेट से भी खेतों में भरे हुए पानी को निकालने की व्यवस्था की।
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किसान बोले, सबसे बड़ा गुनहगार जेई
किसानों ने कहा कि जूनियर इंजीनियर ने किसानों के साथ बदतमीजी की थी। किसानों ने पहले भी नहर टूटने के लिए चेताया था। जेई ने उच्च अधिकारियों ने सही रिपोर्ट नहीं दी, जिस कारण नहर यहां से फिर टूटी। 1992, 1996 और अगस्त 2016 में भी इस एरिया में नहर टूट चुकी है। इससे किसानों को भारी नुकसान हो चुका है।
पानी बंद होने के बाद दुरुस्त होगी नहर
मौके पर पहुंचे सिंचाई विभाग के एक्सईन राजेश कुमार ने कहा कि पूरी स्थिति से अधिकारियों को अवगत करा दिया है। फिलहाल नहर का बहाव रोका गया है। नहर में पानी बंद होने के बाद इसे दुरुस्त किया जाएगा।
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1000 एकड़ में फसलें खराब
किसानों ने बताया कि करीब 800 से 1000 एकड़ में फसलें खराब हो गई हैं। इनमें कपास, धान, बाजरे की फसलें खराब हो चुकी हैं। किसानों को 50 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।

फोटो 17 से 22
किसानों ने ट्यूबवेल के पंपसेट से खेतों में भरे पानी को निकाला
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