अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक विजेता पूजा ढांडा ने अगस्त में होने वाले एशियन गेम्स में अपना स्थान पक्का कर लिया है। लखनऊ में रविवार को एशियन गेम्स के लिए हुए ट्रायल में पूजा ढांडा ने रेलवे की ललिता को शिकस्त देते हुए 57 किग्रा भारवर्ग में अपना स्थान पक्का किया। पूजा ने विश्वास दिलाया कि एशियन गेम्स में कॉमनवेल्थ पदक का रंग बदलते हुए देश, प्रदेश व गांव बुड़ाना का मान बढ़ाएंगी।
एक जनवरी 1994 में जिले के गांव बुड़ाना में जन्मी पूजा ढांडा ने अपने खेल कॅरिअर की शुरुआत वर्ष 2009 में जूडो खिलाड़ी के रूप में की थी। मगर बाद में पूजा ने कुश्ती खेलना शुरू किया और अगले ही वर्ष कुश्ती में देश की पहली महिला यूथ ओलंपियन का खिताब अपने नाम किया। इसके बाद पूजा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और वर्ष 2014 तक अपने खेल में लगातार निखार लाते हुए विभिन्न इंटरनेशनल कैडेट और जूनियर स्तरीय प्रतियोगिताओं में जीत का परचम लहराया।
चोट से उभरकर की वापसी
वर्ष 2015 में खेल के दौरान पूजा चोटिल हो गई, जिसके चलते चिकित्सकों ने उसे खेलने से मना कर दिया। इस दौरान पूजा का ऑपरेशन भी हुआ। पूजा को हर समय यह मलाल रहता था कि खेल प्रतिभा होने के बावजूद वह खेल नहीं पा रही है, लेकिन परिजनों ने उसके आत्मविश्वास को बनाए रखा, जिसकी बदौलत पूजा ने जनवरी 2017 में शानदार वापसी की और दिल्ली में आयोजित प्रो रेसलिंग लीग चैंपियनशिप में अपने से लगभग तीन गुणा कीमत पर खरीदी गई मंजू सिहाग को 4-1 से शिकस्त दी। जिसके बाद पूजा एक बार फिर फार्म में लौटी और नेशनल वुमन चैंपियनशिप से लेकर कॉमनवेल्थ रेसलिंग चैंपियनशिप तक गोल्डन दांव लगाते हुए गत दिसंबर माह में कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए हुए ट्रायल में अपना नाम पक्का किया। पूजा ने जनवरी 2018 में भी प्रो रेसलिंग चैंपियनशिप सीजन थ्री में गोल्डन दांव लगाया था। जिसमें पूजा ने पंजाब रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए ओवरऑल ट्राफी दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाई थी। वहीं इसी वर्ष अप्रैल में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में पूजा ने रजत पदक प्राप्त किया था। पूजा ढांडा का कहना है कि अब एशियन गेम्स में रजत पदक को स्वर्ण पदक में बदलना ही उनका पहला लक्ष्य है।