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यमुनानगर- अंबाला ने सबसे ज्यादा तोड़े जाति बंधन, भिवानी- हिसार में सबसे ज्यादा अनुसूचित उत्पीड़न

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हिसार।
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जाति के बंधन तोड़ने में यमुुनानगर जिला सबसे आगे है। हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा से लगते यमुनानगर और अंबाला में पिछले एक साल में 50 युवाओं ने जाति के बंधन तोड़कर शादी रचाई। प्रदेश में पिछले छह महीने में कुल 161 युवाओं ने अंतर जातीय विवाह किया। इनमें एक तिहाई के करीब इन दो जिलों से हैं। प्रदेश में छह महीने में अनुसूचित वर्ग में 220 लोग उत्पीड़न के शिकार हुए। इनमें भिवानी में 52 और हिसार में 48 ने उत्पीड़न का केस दर्ज कराया।
जातीय भेदभाव खत्म करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से मुख्यमंत्री सामाजिक समरसता अंतर जातीय विवाह शगुन योजना में चालू वित्तवर्ष से इंटर कास्ट मैरिज करने वालों को एक लाख का शगुन दिया जाता है। अगर प्रदेश में पिछले छह महीने की बात करें तो 161 युवाओं ने इस योजना में आवेदन किया। इस योजना की शर्त है कि इंटर कास्ट मैरिज में लड़का-लड़की में एक अनुसूचित वर्ग का होना चाहिए। दूसरा ओबीसी या सामान्य वर्ग से होना चाहिए। बीतेे छह महीने में प्रदेश के 22 जिलों में कुल 161 ने इंटर कास्ट मैरिज की। इसमें सबसे अधिक 30 दंपति यमुनानगर से हैं। दूसरा नंबर अंबाला जिले का है। यहां 20 जोड़ों ने इंटर कास्ट मैरिज की थी।
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प्रदेश में इंटर कास्ट मैरिज का आंकड़ा
प्रदेश के चार जिलों में एक भी जोड़े ने इंटर कास्ट मैरिज कर इस योजना में आवेदन नहीं किया। रोहतक में 18, सिरसा में 17, करनाल में 11, कैथल में 9, हिसार में आठ जोड़ों ने इंटर कास्ट मैरिज की। पानीपत में तीन, झज्जर में 4, गुरुग्राम में 4, रेवाड़ी में 5, सोनीपत में 5, जींद में 6 युवाओं ने अंतर जातीय विवाह किया। फरीदाबाद, मेवात, महेंद्रगढ़, पलवल जिले में किसी भी युवा ने इंटर कास्ट मैरिज योजना में आवेदन नहीं किया। पंचकूला, कुरुक्षेत्र में केवल दो-दो जोड़ों ने ही इंटर कास्ट मैरिज की।
छह महीने में अनुसूचित वर्ग के 220 लोगों का उत्पीड़न
अनुसूचित वर्ग के अत्याचार पीड़ितों में भिवानी सबसे आगे है। प्रदेश में कुल 220 लोगों को अत्याचार पीड़ितों को मदद दी गई। इसमें भिवानी में सबसे अधिक 52 और हिसार में 48 पीड़ितों को यह मदद दी गई। इन दो जिलों में प्रदेश के करीब आधे केस दर्ज हुए। करनाल, नारनौल, पंचकूला, यमुनानगर में एक भी उत्पीड़न केस नहीं। अनुसूचित वर्ग के किसी व्यक्ति को सामान्य या ओबीसी वर्ग का कोई व्यक्ति मर्डर, डकैती, रेप, आगजनी, नरसंहार, जमीन पर कब्जा करता है तो ऐसे पीड़ित को सरकार आर्थिक मदद करती है। पुलिस की ओर से एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज होने पर 25 प्रतिशत मदद तुरंत दी जाती है। पीड़ितों को अपराध के अनुसार 85 हजार रुपये से 8.25 लाख रुपये तक प्रदान किए जाते हैं।
प्रदेश में उत्पीड़न के केस
पिछले छह महीने में अनुसूचित वर्ग के 220 लोगों ने उत्पीड़न का केस दर्ज कराया। भिवानी में 52, हिसार में 48, रोहतक में 21, पानीपत में 19, अंबाला में 15, झज्जर में 13, कुरुक्षेत्र में 12 केस दर्ज हुए। जींद में 7, कैथल में 9, पलवल में 9, मेवात में 3, सोनीपत में 3, गुरुग्राम में तीन, फतेहाबाद में दो, सिरसा में उत्पीड़न का एक केस दर्ज होने पर आर्थिक सहायता दी गई।
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इंटर कास्ट मैरिज पर भी एक लाख रुपये का शगुन दिया जाता है। इंटर कास्ट मैरिज करने वालों को 1.92 करोड़ रुपये दिए गए हैं। भिवानी और हिसार में सबसे अधिक उत्पीड़न केस हैं। उत्पीड़न का शिकार बने लोगों को छह माह में करीब 3.49 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
-जगत बिश्नोई, जिला कल्याण अधिकारी हिसार
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