अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
जिले की बेटियों ने सफलता के मुकाम हासिल किए। पिछली बार टॉप टेन में हिसार जिले का कोई स्टूडेंट नहीं था। इस बार जिले की सात बेटियों ने टॉप टेन में जगह बनाई। इसमें किसी भी बेटी ने कोचिंग नहीं ली। बिना कोचिंग खुद मेहनत करते हुए घर के काम में भी मदद की। अपने परिजनों का गोबर उठाने, झाडू लगाने, खाना बनाने, खेत में फसल काटने तक हर जगह सहयोग किया। इसके बावजूद बेटियों ने टॉप टेन में जगह बनाई।
कीर्ति बंसल : टॉप टेन में छठा स्थान
पिता चलाते हैं एक्सरे मशीन, बेटी बनना चाहती हैं सीए
प्रदेश में छठा स्थान हासिल करने वाली कीर्ति बंसल सीए बनना चाहती हैं। कीर्ति ने दसवीं में 491 अंक लेकर प्रदेश की टॉप टेन लिस्ट में छठा स्थान हासिल किया। जीएनजेेएन गोयंका स्कूल की छात्रा कीर्ति के पिता निजी अस्पताल में एक्सरे मशीन संचालन का काम करते हैं। कीर्ति की मां कुसुम बंसल गृहणी है। कुसुम बंसल ने भी दसवीं कक्षा में 1998 में ब्लॉक लेवल पर टॉप किया था। कीर्ति ने बताया कि परीक्षा के दौरान वह बीमार हो गई थी। उसकी गर्दन में दर्द शुरू होने के कारण सामाजिक विज्ञान का पेपर अच्छा नहीं हुआ। कीर्ति ने बताया कि उसने किसी तरह की कोचिंग नहीं ली।
अंजू : टॉप टेन में आठवां नंबर
पिता करते हैं खेतीबाड़ी, बेटी बनना चाहती हैं डॉक्टर
जीएनजेएन स्कूल की अंजू के पिता किसान है। बुगाना निवासी नरेंद्र ने बताया कि वह अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए गांव छोड़कर हिसार में आए। फिलहाल मेला ग्राउंड में रहते हैं। खेती करने के लिए गांव जाते हैं। अंजू को 488 अंक मिले हैं। प्रदेश में अंजू की आठवीं रैंक है। अंजू ने कहा कि वह डॉक्टर बनना चाहती है। इस सफलता के लिए उसने कोचिंग नहीं ली। अंजू ने बताया कि उसकी मां घर के काम के लिए नहीं कहती, फिर भी वह मां की मदद करती है। पढ़ाई के अलावा उसे स्टेज नाटक का शौक भी है। अंजू की मां कृष्णा कुमारी भावुक होकर बोलीं, आज मेरी बेटी ने गर्व से सिर ऊंचा कर दिया।
अक्षिता : टॉप टेन लिस्ट में दसवें स्थान पर
पिता करते हैं मजदूरी, बेटी बनना चाहती हैं प्रोफेसर
जीएनजेएन गोयंका स्कूल की छात्रा अक्षिता ने 487 अंक लेकर प्रदेश की टॉप टेन लिस्ट में दसवां स्थान पाया। अक्षिता ने बताया कि उसके पिता रणबीर सिंह मजदूरी का काम करते हैं। मां संतोष गृहणी है। अक्षिता ने कहा कि उसने आज तक कभी कोचिंग नहीं ली। घर पर रोजाना 6 से 8 घंटे पढ़ती थी। जो विषय समझ में नहीं आता था, उसके बारे में टीचर से पूछती रहती थी। टॉप टेन में शामिल होने वाली अक्षिता प्रोफेसर बनना चाहती है। अक्षिता की मां संतोष ने कहा कि अपनी बेटी को किसी कॉलेज की प्रोफेसर देखना चाहती है। बेटी उसके सपने को पूरा करने के लिए मेहनत कर रही है।
प्रेरणा : टॉप टेन में नौवां स्थान
पिता अध्यापक, बेटी बनना चाहती हैं आईएएस
प्रदेश में नौवां स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा प्रेरणा शर्मा ने बताया कि वह स्कूल और घर में 13 से 15 घंटे पढ़ाई करती हैं। खाली समय में बैडमिंटन खेलने के साथ कुछ समय मनोरंजन के लिए टीवी देखने का शौक भी रखती है। प्रेरणा के पिता सतबीर सिंह सरकारी स्कूल में अध्यापक हैं। माता संतोष घरेलू महिला है। माता-पिता से मिले संस्कारों और मार्गदर्शन से उसने बचपन से ही अपने पढ़ने के शौक को उसने जनून में बदला और दसवीं कक्षा में पूरे प्रदेश में नौवां स्थान हासिल करके यह साबित भी कर दिया। प्रेरणा आईएएस बनकर देश सेवा करना चाहती हैं। प्रेरणा के पिता सतबीर सिंह और माता संतोष ने कहा कि उन्होंने लड़का और लड़की में कभी भेदभाव नहीं किया।
हर्षिता : टॉप टेन में 10वां स्थान
मां अध्यापिका, बेटी बोली- मैं बनूंगी प्रोफेसर
प्रदेश में दसवां स्थान प्राप्त करने वाली टैगोर सीनियर सेकेंडरी स्कूल की ही छात्रा हर्षिता ने बताया कि वो स्कूल और घर पर 12 से 13 घंटे पढ़ती है। पढ़ाई का काम पूरा होने पर अपनी सहेली प्रेरणा के साथ मिलकर बैडमिंटन का खेलती है। उसने बचपन से ही प्रोफेसर बनने का सपना संजोया हुआ है। अधिक मेहनत के बिना हासिल नहीं हो सकता। इसलिए वो दिन-रात अपना मकसद प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करती है। हर्षिता की मां सरिता देवी अध्यापिका हैं। पिता रविंद्र व्यापार करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। उसकी माता सरिता देवी व पिता रविंद्र ने बताया कि बेटी की उपलब्धि ने उनका सिर ऊंचा कर दिया।
वंदना : टॉप टेन में 10वां स्थान
पिता डाक अधिकारी, बेटी बोली - मैं बनूंगी सीए
होली चाइल्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल हिसार की छात्रा वंदना ने कहा उसे उम्मीद से कम नंबर आए हैं। प्रदेश में दसवें स्थान पर रही वंदना को 490 से अधिक अंक आने की उम्मीद थी। उसे 487 नंबर ही मिले। वंदना के पिता डाबड़ा गांव में पोस्ट ऑफिसर हैं। वंदना ने कहा कि वह उसने बिना कोचिंग के ही सफलता हासिल की। वह रोजाना छह घंटे पढ़ती थी। वंदना की मां गृहणी है। वंदना सीए बनना चाहती है। वंदना ने बताया कि वह स्कूल आने से पहले अपनी मां का घर के काम में हाथ बंटाती है। झाडू-पोचा, खाना बनाने में सहयोग करती हैं। वंदना को डांस का शौक है।
शोभा : टॉप टेन में दसवां स्थान
पिता किसान, बेटी बोलीं - मैं बनूंगी इंजीनियर
गुरु जंभेश्वर सीनियर सेकेंडरी स्कूल कालवास की छात्रा शोभा ने 487 अंक हासिल कर प्रदेश की टॉप टेन में दसवां स्थान हासिल किया। शोभा के पिता सुरेंद्र किसान हैं। गांव मंगाली की रहने वाली शोभा ने बताया कि जब फसल की कटाई का काम होता है, तब वह घर का काम करती है। शोभा मंगाली से कालवास रोजाना बस में सवार होकर आती है। शोभा ने कभी कोचिंग नहीं ली। शोभा इंजीनियर बनकर देश सेवा करना चाहती है। स्कूल टीचर सुरेंद्र ने बताया कि शोभा शुरू से ही मेधावी छात्रा है। जिस कारण स्कूल ने उसकी फीस माफ कर रखी है।