खारा बरवाला की बेटी का विदेश मंत्रालय में एएसओ के पद पर चयन
बेटी को पढ़ने के लिए बाहर भेजा तो बनीं ऑफिसर
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी आदमपुर।
एक तरफ जहां सरकार बेटियों को समाज में आगे बढ़ाने और बेटों के समान हक दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत है तो वहीं बेटियां भी किसी भी क्षेत्र में खुद को साबित करने में पीछे नहीं हैं। ऐसी ही मिसाल पेश की है आदमपुर खंड के गांव खारा बरवाला की बेटी रितू ने। गांव की बेटी रितू विदेश मामलों के मंत्रालय में सहायक अनुभाग अधिकारी के पद पर चयनित हुई है। गांव के पूर्व सरपंच आशा रानी और ठाकर दत्त की होनहार बेटी रितू की इस उपलब्धि पर गांव खारा बरवाला में खुशी का माहौल है। गांव की सरपंच शालू रानी ने वर्तमान में खेल, शिक्षा, विज्ञान और राजनीति सहित कोई भी ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां बेटियों ने परचम नहीं फहराया हो। आज देश की बेटियां हर क्षेत्र में एक नई शक्ति बनकर उभरी हैं। उनकी यह रफ्तार अब रुकने वाली नहीं है। ग्राम पंचायत भी अब महिला, दलित, पिछड़े और वंचितों को आगे लाने के लिए प्रयासरत है। रितू ने बताया कि आदमपुर में मैट्रिक की पढ़ाई के बाद बाहर पढ़ने के लिए चली गई। हिसार के निजी स्कूल से 12वीं पास करने के बाद फरीदाबाद से बीटेक की। इसके बाद इस परीक्षा के लिए तैयारी के लिए जुट गई। पूर्व सरपंच आशा रानी ने कहा कि संकीर्ण मानसिकता एवं रूढ़िवादी सोच के चलते आमतौर पर गांव में बेटियों को पढ़ने के लिए लोग बाहर नही भेजते, लेकिन उन्होंने रितू को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। पढ़ाई में बचपन से ही होशियार रितू अब आदमपुर के एसबीआई में असिस्टेंट के पद पर कार्यरत है। रितू ने बताया कि एसएससी सीजीएल की गत वर्ष हुई परीक्षा के लिए देशभर से करीब 30 लाख आवेदन भरे गए थे। इसके बाद अब आए परीक्षा परिणाम में विभिन्न पदों पर करीब 9,000 का चयन किया गया है।