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हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड ने गलती छिपाने को अब ठेका रद्द करने की सिफारिश की एमडी को

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हिसार। हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड हिसार ने जेसीबी का टेंडर देने में नियमों की अवहेलना करने के मामले में अब अपनी गलती छिपाने को बोर्ड मुख्यालय में एमडी को पत्र लिखकर ठेका रद्द करने की सिफारिश की है। यह पत्र बोर्ड के चीफ सुपरिंटेंडेंट ने एमडी पंचकूला को लिखा है। इस मामले में शिकायतकर्ता का कहना है कि अब चूंकि ठेका अवधि पूरी होने वाली है, इसलिए ठेकेदार व नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ केस दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
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एमडी को लिखे पत्र में बोर्ड के चीफ सुपरिंटेंडेंट ने कहा कि 29 जून 2018 को जेसीबी के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किया गया था। 675 रुपये प्रति घंटा के हिसाब से हिसार के कृष्ण कुमार को यह ठेका दिया गया। शर्तों के अनुसार ठेकेदार ने जेसीबी की आरसी फरीदाबाद के सतपाल सिंह के नाम से लगाई, जिसकी वैधता 24 मई 2013 को समाप्त हो चुकी थी। हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड ने ठेकेदार को 20 दिसंबर 2018 को पत्र लिखकर आरसी का वैधता प्रमाण पत्र जमा कराने के लिए तीन दिन का समय दिया, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इस पर चीफ सुपरिंटेंडेंट ने ठेका रद्द करने की सिफारिश की।

ठेके की शर्त नंबर 20 और 21 का उल्लंघन
ठेकेदार ने ठेके की शर्त नंबर 20 व 21 का उल्लंघन किया है। शर्त नंबर 20 में लिखा है कि ठेकेदार को अपनी जेसीबी की आरसी की फोटोकॉपी अटेस्ट करवाकर कार्यालय में जमा करवानी होगी। इसी तरह शर्त नंबर 21 में लिखा है कि यदि कोई ठेकेदार ठेके की सभी शर्तों को पूरा नहीं करता होगा तो उसे ठेका नहीं दिया जाएगा। इस केस में न तो ठेकेदार ने आरसी जमा कराई। जो आरसी उसने दी, उसकी वैधता समाप्त हो चुकी थी। ऐसे में जिन अधिकारी या कर्मचारी उसे चेक किया, उसकी भी कहीं न कहीं गलती रही, क्योंकि उन्होंने ठेका पास कैसे कर दिया। शर्त 21 के अनुसार जब ठेकेदार शर्त पूरी नहीं कर रहा था तो उसे ठेका कैसे दे दिया गया।
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अब ठेके की अवधि में मात्र 26 दिन बचे
इस ठेके में कहीं न कहीं अधिकारियों की भी मिलीभगत हो सकती है। पहले ठेका ऐसे ठेकेदार को दे दिया गया, जो शर्तें पूरी नहीं कर रहा था। अब जब इस मामले की सीएम विंडो पर शिकायत हुई तो उच्च अधिकारियों को ठेका रद्द करने की सिफारिश की गई, जबकि वर्ष 2018-19 के लिए छोड़े गए इस ठेके की अवधि मार्च 31 तक ही है और इसमें केवल 26 दिन ही शेष बचे हैं।


मैंने इस बारे में सीएम विंडो पर शिकायत लगाई थी। यह फर्जी तरीके से टेंडर दिया गया था, जो अब साबित हो गया है। इसमें केवल ठेका रद्द करने से कुछ नहीं होता, बल्कि ठेकेदार और शर्तों को चेक किए बिना टेंडर जारी करने वाले लापरवाही कर्मचारी या अधिकारी के खिलाफ केस दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
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- मुकेश कुमार, ठेकेदार, हिसार।

हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड, हिसार के चीफ सुपरिंटेंडेंट डॉ. एसके बागोरिया से सीधी बातचीत
सवाल : क्या इस मामले में कोई केस करवाएंगे सर?
जवाब : कर रहे हैं, उसको एग्जामिन कर रहे हैं।
सवाल : क्या इसमें किसी तरह के केस की कार्रवाई नहीं बनती सर?
जवाब : एग्जामिन कर रहे हैं।
सवाल : टेंडर ऐसे कैसे जारी कर दिया, शर्त ही पूरी नहीं थी, क्या चेकिंग नहीं होती?
जवाब : चेकिंग तो होती है।
सवाल : फिर किस लेवल पर चूक हुई?
जवाब : आरसी चेक करवाई ना, आरसी गलत है उसकी।
सवाल : लेकिन आरसी दिसंबर 2018 में चेक हुई, टेंडर के समय क्यों नहीं हुई?
जवाब : कर रहे हैं, इसको एग्जामिन कर रहे हैं।
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