15वीं-16वीं सदी में मुगल शहंशाह जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर के शासन काल में प्रयोग की जाने वाली अशर्फियां करीब 413 साल बाद गांव सिवानी बोलान में ईंटों की थपाई करने वाले मजदूरों को मिली हैं।
पंडित ओम प्रकाश भट्टा वालों ने 975 तांबे और दो सोने की अशर्फियां पुरातत्व विभाग को सौंपी हैं। यह अशर्फियां अब पुरातत्व विभाग के जहाज पुल स्थित जोनल म्यूजियम की शान बनेंगी।
एक माह तक अशर्फियों की सफाई का काम चलेगा। प्रथम चरण में अशर्फियों से मिट्टी साफ की जाएगी और बाद में उसे कैमिकल से साफ किया जाएगा। इनके चित्र भी लिए जाएंगे। अशर्फियाें पर उर्दू से अकबर काल को दर्शाया गया है। पांच साल पहले सिवानी बोलान में इस भट्टे की शुरुआत हुई थी।
सोमवार सुबह मजदूर ईंट पथाई का काम कर रहे थे। इस दौरान खुदाई करते समय जैसे ही पत्थरनुमा सिक्के दिखे तो उन्होंने इसकी जानकारी भट्टा मालिक को दी। भट्टा मालिक ओम प्रकाश ने इसकी जानकारी पुरातत्व विभाग को दी।
सूचना मिलते ही विभाग की टीम मौके पर पहुंची और 975 तांबे और दो सोने के सिक्कों को अपने कब्जे में ले लिया। उल्लेखनीय है कि इससे पहले नारनौंद थाने के जरिए पुरातत्व विभाग ने 128 चांदी और 151 सोने के सिक्के अपने कब्जे में लिए थे।