हिसार। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के जस्टिस प्रीतम पाल ने शुक्रवार को पर्यावरण संरक्षण के लिए जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों की बैठक ली। ढुलमुल कार्यशैली से नाराज दिखे जस्टिस ने अधिकारियों की जमकर खिंचाई की। सबसे अधिक क्लास जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ली गई। पटेल नगर में दूषित पेयजल के बारे में जब जस्टिस ने पूछा तो जन स्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन को जवाब देते नहीं बना।
जस्टिस ने कहा कि पैसा कमाने की बजाय पुण्य कमाओ। लोगों को साफ पानी पिलाओ। वो दुआ देंगे तो पुण्य मिलेगा। इसी तरह उन्होंने नगर निगम अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुुए कहा कि जिसके घर के बाहर भी कचरा मिले, उस पर जुर्माना लगाओ। घर के आगे कचरा नहीं हो, इसकी जिम्मेदारी घर के मालिक की भी बनती है। उन्होंने अधिकारियों को कचरा प्वाइंट्स पर डस्टबिन के बजाय बाहर कूड़ा डालने वालों पर भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसकी जांच के लिए ऐसे प्वाइंट्स पर सीसीटीवी लगाने को भी कहा गया। जस्टिस ने सभी अधिकारियों को महीने में एक बार फील्ड में जाकर साइट्स की जांच करने के निर्देश दिए।
हर महीने तैयार की जाएगी रिपोर्ट
जस्टिस ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कचरा सही स्थान पर नहीं डालने वालों, कचरा जलाने वालों, पर्यावरण प्रदूषित करने वालों, बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण सही नहीं करने वालों पर अलग-अलग विभागों की ओर से क्या-क्या कार्रवाई की गई, इसकी रिपोर्ट हर महीने तैयार होनी चाहिए।
हर साल गंदा पानी पीने से हो रही छह लाख मौत
जस्टिस प्रीतम पाल ने बैठक में आंकड़े देते हुए बताया कि हर साल गंदा पानी पीने से छह लाख लोगों की जान जा रही है। सरकार से लेकर एनजीटी तक के स्पष्ट आदेश हैं कि लोगों को पीने के लिए साफ पानी मिलना चाहिए। मगर इसके बावजूद यह हालात हैं। अगर अधिकारियों व सरकार में इच्छाशक्ति हो तो कोई भी काम असंभव नहीं है। पूरी ईमानदारी से प्रयास करें तो लोगों को साफ पानी पिलाने में हम कामयाब हो सकते हैं।
मेयर को बैठक में बुलाकर कहा, हर वार्ड में कमेटी बनाओ
बैठक में जस्टिस प्रीतम पाल ने मेयर गौतम सरदाना को भी बुला लिया। उन्होंने मेयर से कहा कि वह पार्षदों की बैठक बुलाकर उन्हें एनजीटी के प्रावधानों की जानकारी दें। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल 2016 के बारे में भी बताएं। इसके बाद हर वार्ड में पांच-पांच लोगों की कमेटी बनवाएं, जो कचरा फेंकने वालों पर निगरानी रख सके।
मौके पर नहीं जाने वाले अधिकारियों को तो टर्मिनेट करो
उन्होंने अधिकारियों द्वारा मौके पर जाकर निरीक्षण नहीं करने को लेकर भी गुस्सा जाहिर किया। जस्टिस ने कहा कि अधिकारियों को ऑफिस में बैठकर नहीं, बल्कि मौके पर जाकर निरीक्षण करना चाहिए। जो अधिकारी मौके पर नहीं जाता है उसे तो टर्मिनेट कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर जगह सरकार नहीं जाएगी। ग्राउंड लेवल पर तो अधिकारियों को काम करना होता है। इसलिए एसी ऑफिस छोड़कर ग्राउंड लेवल पर भी जाना शुरू करो।
वन विभाग को हर पौधे की मॉनीटरिंग करने के निर्देश
बैठक में वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछली बार विभाग ने चार लाख पौधे लगाए थे। इस बार 5 लाख 23 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पर जस्टिस ने कहा कि सिर्फ पौधे लगाने तक ही सीमित नहीं रहना है। हर पौधे की मॉनीटरिंग होनी चाहिए। जीपीएस के जरिये पता किया जाना चाहिए कि कितने पौधे लगाने के बाद जीवित रहते हैं। उन्होंने हर महीने जीपीएस से जांच करके रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए।
जस्टिस सुबह उठकर खुद चले गए निरीक्षण करने
बैठक के लिए जस्टिस प्रीतम पाल वीरवार शाम को ही हिसार पहुंच गए थे। वह रेस्ट हाउस में रुके। उन्होंने शुक्रवार सुबह उठकर बैठक से पहले रेस्ट हाउस के आसपास के एरिया का निरीक्षण किया। रेस्ट हाउस से आगे बने न्यायाधीशों के क्वार्टरों के पास उन्होंने डस्टबिन की हालत देखी। उन्होंने पाया कि डस्टबिन खाली पड़ा था, जबकि उसके आसपास नीचे कचरा डाला हुआ था। बैठक में यह मामला रखकर उन्होंने अधिकारियों को इस स्थिति में सुधार करने के निर्देश दिए। बैठक में हिसार के डीसी अशोक कुमार मीणा, जींद के डीसी डॉ. आदित्य दहिया, कैथल की डीसी डॉ. प्रियंका सोनी के अलावा स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जन स्वास्थ्य विभाग, सिंचाई विभाग सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।