मंडी आदमपुर (हिसार)। लोकसभा चुनाव में अपने बेटे भव्य बिश्नोई की करारी हार से आहत हुए आदमपुर से विधायक कुलदीप बिश्नोई शुक्रवार सुबह मंडी आदमपुर की अनाज मंडी स्थित अपने प्रतिष्ठान पर पहुंचे। यहां उन्हें कार्यकर्ताओं के सामने हार का दुख बयां किया। उनका का कहना था कि हिसार कभी उनका घर नहीं था, उनका घर तो केवल आदमपुर है। लोकसभा चुनाव में हार का उतना दुख नहीं है, जितना आदमपुर से हार कर दुख हुआ है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कार्यकर्ताओं से कहा कि वे दो जून तक आदमपुर की जनता से पूछ लें, अगर उन्हें भजनलाल परिवार पसंद नहीं है तो वह राजनीति छोड़ देंगे और जनता जिस भी नए नेता को चुनना चाहे, वह चुन लें। कुलदीप ने कहा कि एक चुनाव में चौधरी भजनलाल को हिसार से केवल ढाई हजार वोट मिले थे, इसलिए हिसार कभी उनका घर था ही नहीं। उनका घर तो केवल आदमपुर था, जिसने हर चुनाव के समय उनके परिवार का भरपूर साथ दिया और अब उसी आदमपुर से भव्य को मिली हार से काफी दुखी है। उन्होंने कहा कि अगर आदमपुर हलकावासियों को उन्हें हराना ही था तो हलके के किसी व्यक्ति से हरा देते, बाहरी व्यक्ति से हराने की क्या जरूरत थी।
32 साल की राजनीति में कभी बच्चे से भी ऊंची आवाज में नहीं बोला
उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में मिली हार का उन्हें मलाल नहीं है, क्योंकि यह चुनाव काफी अलग तरह का चुनाव था और मोदी लहर के सामने सभी मुद्दे गौण हो गए। उन्हें तो दुख इस बात का है कि हमारे पारिवारिक हलके आदमपुर से भी भव्य पिछड़ गया। उन्होंने कहा कि पिछले 32 साल से राजनीति में हैं। 1987 आदमपुर उपचुनाव के दौरान उन्होंने काम शुरू किया था। इस दौरान उन्होंने आदमपुर के किसी बच्चे तक से कभी भी ऊंची आवाज में बात नहीं की। पिछले दो साल में बीमारी की वजह से लोगों के बीच कम आया। मगर रेनुका व भव्य ने यह कमी भी पूरी की।
मुझे तो न आने के उलाहने दिए, अब बुला लेना मोदी और मनोहर लाल को
कुलदीप बिश्नोई ने लोगों से कहा कि हमारे परिवार को तो आदमपुर में नहीं आने, लोगों से नहीं मिलने के उलाहने दिए जाते रहे। उन्होंने हर उलाहने स्वीकार किए। आदमपुरवासियों ने उन्हें तो न आने का उलाहना देकर चुनाव में मात दे दी, लेकिन अब बुला लेना मोदी और खट्टर को कान-मुकान के लिए। कुलदीप ने कहा कि मोदी और खट्टर तो दूर की बात अगर बीरेंद्र या बृजेंद्र भी आदमपुर में आ जाए तो देख लेना।
अपना दर्द बयां करते-करते बड़े भाई को नीचा दिखा गए
कुलदीप ने अपना दर्द बयां करते-करते बड़े भाई चंद्रमोहन को नीचा दिखा दिया। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने उनसे कहा था कि तेरे बड़े भाई के लक्षण तुझे पता है। वह नाश करेगा मेरा, तूं मेरा नाम आगे ले जा सकता है। अगर तूने राजनीति नहीं संभाली तो आदमपुर हलका खराब हो जाएगा। इसके बाद ही उन्होंने राजनीति को संभाला था, नहीं तो उनका चुनाव लड़ने का कोई मकसद नहीं था।