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सुरक्षा मानक नहीं अपनाने पर कंपनी पर केस दर्ज

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अमर उजाला ब्यूरो
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बरवाला/हिसार।
पुलिस ने खेदड़ थर्मल प्लांट के बॉयलर में झुलसे मजदूरों के मामले में ईएनईआरजी कंपनी के अधिकारियों पर लापरवाही बरतकर किसी की जान को खतरे में डालने का केस दर्ज किया है। झुलसे लोगों से बयान लिए गए हैं। पुलिस ने हादसे में झुलसे मनोज के बयान पर ठेकेदार प्रवीण और साइट इंचार्ज राजेश पर लापरवाही बरतकर किसी की जान खतरे में डालने का केस दर्ज किया है। पुलिस ने इन पर धारा 336, 337, 338 के तहत केस दर्ज किया है।
डीएसपी जयपाल सिंह ने मंगलवार को अस्पताल पहुंचकर झुलसे मजदूरों के बयान लिए। इसमें झुलसे लोगों ने बताया कि सुरक्षा के मानक नहीं अपनाए गए थे, जिस कारण यह हादसा हुआ। प्लांट में ईएनईआरजी कंपनी के कर्मचारी जब बॉयलर में काम कर रहे थे, उस समय सुरक्षा के लिहाज से पूरे वस्त्र और उपकरण नहीं थे। कर्मियों के पास ऐसे कपड़े नहीं थे, जो आग से बचने के लिए सहायता कर सकें या कर्मचारियों को नुकसान ना हो पाए। विक्रम व अमित प्लांट में पिछले दो माह से ही काम पर लगे थे। उन्हें बॉयलर के काम में ज्यादा अनुभव नहीं था।
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अस्पताल में पहुंचे घायलों के परिजनों का कहना है कि प्लांट में कार्य स्थल पर मजदूरों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। यदि कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाए गए होते तो इस हादसे से होने वाली क्षति को कम किया जा सकता था। उनका कहना है कि जिस कंपनी में ये मजदूर काम कर रहे थे, वह पावर प्लांट में ही काम करने वाली एक नामी कंपनी है, जिस पर कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरतने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कंपनी हर तरह से लापरवाही बरत रही है। ऐश में काम करने के दौरान मजदूरों को सुरक्षा की दृष्टि से केवल और केवल हेलमेट से काम चलाया जा रहा है।
खामियां छुपाने के लिए नहीं जाने दिया मीडियाकर्मियों को अंदर
हादसे के बाद थर्मल प्रशासन ने अपनी खामियां छुपाने के लिए मीडिया को भी प्लांट के गेट पर रोक दिया। इससे थर्मल प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठने लाजिमी हैं। सूत्रों की मानें तो सोमवार रात करीब 12 बजे प्लांट की यूनिट नंबर एक को नो डिमांड कहकर बंद करवा दिया गया, जबकि बॉयलर में यूनिट वन को ऐश फिल्टर में लीकेज होने के चलते रात में बंद किया गया था। यदि ऐसा था तो थर्मल अधिकारियों ने नो डिमांड पर यूनिट बंद करने की बात कर्मचारियों को क्यों कही। लिहाजा आनन-फानन में यूनिट 1 को बंद करवाकर उस पर क्लीनिंग के लिए लेबर को लगा दिया। बॉयलर बंद होने से अगले 48 घंटों तक यूनिट के अंदर प्रवेश नहीं करना होता। पहले भी हुए हैं बड़े हादसे
थर्मल प्लांट में इसके निर्माण से लेकर अब तक कई हादसे हो चुके हैं। वर्ष 2009 में हुए हादसे में चीन के दो इंजीनियरों सहित पांच लोगों की मौत हो गई थी। 27 मई 2011 को हादसे में चार लोग बुरी तरह झुलस गए थे। 7 मई 2012 को पंजाब के मजदूर सुरेंद्र व एक अन्य की मौत हो गई थी। 28 अगस्त 2012 को बॉयलर के ऐश हैंडलिंग सिस्टम में इसी तरह के हादसे के दौरान कोयले के क्लिंकर को तोड़ने के काम में लगे प्लांट के एसडीओ और पांच अन्य कर्मचारी झुलस गए थे।

एसडीओ बोले, छोटा मामला
घायलों का हालचाल जानने पहुंचे एसडीओ विनीत शर्मा ने उनके परिजनों को अंदर नहीं जाने दिया। इसके बाद मीडिया को भी घायलों से नहीं मिलने दिया। एसडीओ बोले यह छोटा-मोटा मामला है। अपने स्तर पर इसे हल कर लेंगे

विधायक डॉ. कमल गुप्ता भी पहुंचे
विधायक डॉ. कमल गुप्ता, भाजपा महामंत्री सुुजीत कुमार मंगलवार देर शाम निजी अस्पताल में घायलों से मिलने पहुंचे। इस मौके पर डॉ. कमल गुप्ता ने चिकित्सकों को निर्देश दिए कि किसी के भी इलाज में कोई चूक न होने दें। घायलों को पूरा उपचार प्रदान किया जाएगा।

खेदड़ के लोग बोले - थर्मल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई हो
हादसे को लेकर खेदड़ के ग्रामीणों में प्लांट प्रशासन के खिलाफ काफी नाराजगी है। हादसे में गांव खेदड़ के तीन युवक शामिल हैं। आग में झुलसने की खबर जब ग्रामीणों को मिली तो काफी ग्रामीण थर्मल प्लांट में पहुंचे। ग्रामीणों ने कहा है कि थर्मल प्लांट में आए दिन हादसे थर्मल प्रशासन की लापरवाही के चलते होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज नहीं किया गया तो ग्रामीण प्लांट के गेट पर ताला जड़ देंगे।
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थर्मल कर्मचारियों ने की नारेबाजी
राजीव गांधी थर्मल प्लांट में हुए हादसे को लेकर यहां कार्यरत कर्मियों ने प्लांट में हंगामा भी किया। कर्मचारियों ने थर्मल मैनेजमेंट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रोषित कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए आरोप लगाए कि थर्मल में सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। नारेबाजी का माहौल हादसे के तुरंत बाद मौके पर पहुंचे बरवाला के डीएसपी जयपाल सिंह के सामने ही शुरू हो गया। मामले के बारे में थर्मल कर्मचारियों ने डीएसपी को शिकायत भी दी है, जिसमें थर्मल में कर्मचारियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने के आरोप लगाए गए हैं। धरने पर बैठे कर्मचारियों का आरोप था कि सुरक्षा के इंतजाम केवल कागजों में हैं। धरातल पर कुछ नहीं है, जब हादसा होता है तो कर्मचारियों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
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