अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
नगर सुधार मंडल के दो करोड़ रुपये के टेंडर मामले में कांट्रेक्टर कोर्ट पहुंच गए हैं। कांट्रेक्टर ने तत्कालीन एक्सईएन रामजीलाल सहित निगम के ज्वाइंट कमिश्नर को पार्टी बनाया है। कोर्ट में उन्होंने आधार बनाया है कि नगर निगम ने उन्हें टेंडर अलॉट होने के तीन महीने बाद तक वर्क ऑर्डर नहीं दिए। वर्क ऑर्डर न देने के बाद जब उन्होंने अपनी धरोहर राशि वापस निकालने की एप्लीकेशन लगाई तो धरोहर राशि नहीं निकाली गई।
एक्सईएन और जेसी को बताया जिम्मेदार
लोअर कोर्ट में डाले गए मामले में उन्होंने एक्सईएन, जेसी को जिम्मेदार बताया है। कांट्रेक्टर ने कहा कि वे बार बार वर्क ऑर्डर मांगते रहे। मगर उनके पास न तो टेक्निकल सैंक्शन थी और न ही उसके बिना काम शुरू हो सकता था। बिना टेक्निकल सैंक्शन के काम करवाना नियमों के खिलाफ है। कांट्रेक्टर ने दोनों अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि अगर टेक्निकल सैंक्शन पहले ली जाती तो यह नौबत नहीं आती। बिना टेक्निकल सैंक्शन लिए ही उन्होंने टेंडर लगा दिए।
दो करोड़ के थे फेज वन और टू में काम
नगर निगम के अधीन नगर सुधार मंडल ने दो करोड़ रुपये के दो टेंडर लगाए थे। इनमें से एक टेंडर कांट्रेक्टर अनिल बंसल और दूसरा टेंडर कांट्रेक्टर गुलशन के नाम निकला था। दोनों को टेंडर अलॉट हो गए। उन्होंने दो प्रतिशत धरोहर राशि जमा करवा दी। यानी 2-2 लाख रुपये धरोहर राशि के रूप में जमा हो गए। ये दोनों टेंडर के काम उन्हें फेज वन और टू में करने थे।
ब्याज सहित मांगी धरोहर राशि
आखिर में कांट्रेक्टर्स ने कोर्ट का सहारा लिया है। कोर्ट के समक्ष उन्होंने जमा करवाई गई धरोहर राशि के ब्याज की भी मांग की है। उन्होंने कहा है कि लाखों की यह राशि पिछले छह महीने से ज्यादा समय से निगम के खाते में पड़ी है। अरनेस्ट मनी वापस मांगने पर भी उन्हें नहीं दी जा रही। ऐसे में छह महीने का हजारों रुपये का ब्याज बनता है। उन्होंने मांग की है कि निगम यह राशि उन्हें ब्याज सहित लौटाए।
यूं अटका था मामला
दो करोड़ रुपये का फेज वन और टू का टेंडर टेक्निकल अप्रवूल के लिए कमीशन देने के मामले को लेकर अटका था। गुरुग्राम में उच्च अधिकारियों को टेक्निकल अप्रवूल के लिए कमीशन भिजवाना था। कांट्रेक्टर्स ने साफ मना कर दिया था कि वह एक भी पैसा कमीशन नहीं देगा। क्योंकि कांट्रेक्ट 28.28 प्रतिशत माइनस में था। बिना कमीशन के टेक्निकल अप्रूवल ऑब्जेक्शन लगकर आ गई। मामला बिगड़ता गया आखिर में वर्क ऑर्डर के तीन महीने निकल गए। उसके बाद टेक्निकल अप्रूवल आई, तब ठेकेदार ने काम करने से इनकार कर दिया था।
हमारी करीब चार लाख रुपये के आसपास धरोहर राशि जमा है। निगम ने 90 दिन के अंदर हमें वर्क ऑर्डर नहीं दिया। जब हमने धरोहर राशि मांगी तो उन्होंने यह राशि जारी नहीं की। हमने एक्सईएन रामजीलाल को बाइनेम और ज्वाइंट कमिश्नर को पार्टी बनाया है।
- अनिल बंसल, कांट्रेक्टर नगर निगम