अमर उजाला ब्यूरो
सिवानी मंडी।
ई-पंचायत प्रणाली का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को धरने के 5वें दिन सरपंचों और सचिवों ने खंड मुख्यालय के मेन गेट के अलावा सभी कार्यालयों पर ताला जड़ दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 11 सरपंचों ने इस दौरान मुंडन करवाकर सरकार के खिलाफ रोष जाहिर किया और कहा कि वे चंडीगढ़ में बुलाई गई सीएम की बैठक में किसी भी कीमत पर भाग नहीं लेंगे। सरपंच बोले कि पहले सीएम सरपंचों को अपमानित किए जाने पर माफी मांगे अन्यथा सभी सरपंच मांगें पूरी नहीं होने पर सामूहिक रूप से इस्तीफा देने को मजबूर होंगे। उधर, सरपंचों की तालाबंदी के कारण खंड मुख्यालय पर कामकाज पूरी तरह से ठप रहा।
गौरतलब है कि एक अप्रैल से हरियाणा सरकार ने राज्य में ई-पंचायत प्रणाली योजना लागू की थी। योजना के लागू होने से पहले ही राज्य में सरपंचों और सचिवों ने इसका विरोध शुरू कर दिया था। गांवों के सरपंच और सचिवों ने इसके विरोध में धरना शुरू किया था और सिवानी में उनका यह धरना 5वें दिन में प्रवेश कर गया।
धरने पर तीन सरपंचों ने अनशन भी रखा। इस धरने को भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान रवि आजाद और तहसील प्रधान भल्ले राम भी समर्थन देने पहुंचे और उनकी मांगों को जायज ठहराया। धरने के 5वें दिन सरपंचों ने खंड मुख्यालय के सभी कार्यालयों पर ताला जड़ने के बाद मेन गेट पर ताला जड़ दिया और रोजाना की तरह यहां धरना लगाकर बैठ गए। सरपंचों व सचिवों ने इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मुंडन करवा कर रोष जाहिर किया।
सरपंचों ने चंडीगढ़ में सीएम के बुलावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वे किसी भी सूरत में चंडीगढ़ नहीं जाएंगे। सबसे पहले सीएम चंडीगढ़ में किए गए उनके अपमान की माफी मांगे। धरने के दौरान ग्राम सचिवों और सरपंचों नेे नारेबाजी की। इस मौके पर सरपंच यूनियन की प्रधान जीवनी देवी, महेंद्र खेड़ा, धर्मसिंह श्योराण, राजू मोघरकां, गुड्ड बिधवानिया, अनिल कुमार, राजेश कुमार, रामनिवास, राममेहर, महताब सिंह, अत्तर सिंह, राजेश सिवाच आदि मौजूद रहे।