चार साल से चल रही शिकायत, निगम फोर्स लेकर पहुंचा तो दुकानदार दुकान बंद कर भागा
- दूसरे दुकानदार ने किया दावा मेरे नाम है बिल्डिंग, टीम के जाते ही खोल दी दुकान
अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
चार सालों से शिकायत के बाद मंडी रोड स्थित दुकान को खाली करवाकर सील करने गई टीम खाली हाथ लौट आई। 50 की संख्या में पुलिस और निगम कर्मचारियों की टीम को लेकर पहुंची टीम को कुछ हाथ नहीं लगा। दुकानदार को इस मामले की पहले ही भनक लग गई और वह दुकान बंद कर मौके से भाग गया। निगम की टीम बेबस नजर आई। मौके पर मौजूद एक दुकानदार ने कहा कि जिस व्यक्ति के नाम आप नोटिस भेज रहे हो वह तो उसकी दुकान है ही नहीं यह दुकान तो मेरी है। मुझे आज तक कोई नोटिस या सूचना नहीं मिली। दुकानदार की ऐसी बात सुनकर निगम अधिकारी हैरान हो गए। अधिकारियों ने मंगलवार तक दुकान मालिक होने का दावा करने वाले व्यक्ति को समय दिया है। वह निगम अधिकारियों के सामने दस्तावेज पेश करेगा।
दिए थे दुकान खाली करवाने के आदेश, ड्यूटी मजिस्ट्रेट पहुंचे टीम लेकर
इस निर्माण की वर्ष 2015 में शिकायत दी गई थी। मामले को लेकर नगर निगम ने नोटिस देते हुए पुलिस को दुकान खाली करवाने बारे लिखा था। जिसके पत्र का आदान प्रदान चलता रहा। पुलिस ने आखिर में ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त करने बारे लिखा कि वहां झगड़ा हो सकता है। इसको लेकर आखिर चार साल बाद नगर निगम की नींद टूटी और पिछले महीने 23 जून को कमिश्नर ने दुकान खाली करवाकर बिल्डिंग सीलिंग के आदेश दिए।
आरटीआई एक्टिविस्ट ने की थी शिकायत
मामले को लेकर आरटीआई एक्टिविस्ट रविंद्र कुमार ने मंडी रोड स्थित दुकान के अवैध तरीके से निर्माण को लेकर जिला उपायुक्त और नगर निगम प्रशासन को बार-बार शिकायत की थी। उन्होंने अवैध निर्माण रुकवाने की मांग की थी। मामले को लेकर आखिर में शनिवार को नायब तहसीलदार हरकेश गुप्ता को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। करीब 25 पुलिस कर्मचारियों की फोर्स और नगर निगम के सफाई सहित अन्य 25 कर्मचारियों के साथ लेकर वे मौके पर पहुंचे। निगम के ईओ इंद्रजीत कुलड़िया, एमई अमित कौशिक, बिल्डिंग इंस्पेक्टर सुनील लांबा पहुंचे। टीम जब पहुंची तो दुकान बंद मिली।
शिकायतकर्ता का आरोप टीम के जाते ही खुल गई दुकान
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि नगर निगम की टीम के जाते ही दुकान मालिक ने दुकान खोल ली। उन्होंने आरोप लगाया है कि नगर निगम की टीम ने जाने से पहले दुकान मालिक को सूचना देकर मौके से भगा दिया। इसके बावजूद न दुकान को तब तक बंद रखने के निर्देश दिए जब तक शिकायत का निपटान न हो। दूसरा जो दुकानदार अपनी दुकान होने का दावा कर रहे थे वो मौके पर कोई दस्तावेज पेश नहीं कर पाए।