अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। नगर निगम के प्रॉपर्टी टैक्स बिलों की खामियां 31 मार्च तक भी ठीक होने की संभावना नहीं है। रोजाना 100 से 150 शहरवासी बिल ठीक करवाने के लिए निगम कार्यालय पहुंच रहे हैं। इनमें से कुछ ही लोगों के बिल ठीक हो पाते हैं, जबकि अन्य शहरवासियों को निराश होकर अगले दिन का इंतजार करना पड़ता है। हालात ऐसे हैं कि कई बिलों को साथ लेकर जाने वाले खुद पार्षद भी घंटों इंतजार के बाद लौट जाते हैं। भाजपा समर्थित पार्षद भी मानते हैं कि 31 मार्च तो क्या 30 अप्रैल तक भी शहरवासियों के प्रॉपर्टी टैक्स बिलों की गलतियों को नहीं सुधारा जा सकता।
गौरतलब है कि 31 मार्च तक प्रदेश सरकार की ओर से प्रॉपर्टी टैक्स बिलों में सौ प्रतिशत ब्याज की छूट दी गई है। 31 मार्च की शाम 5 बजे के बाद यह छूट खत्म हो जाएगी। इसलिए शहरवासियों की मांग रहती है कि गलत बिल को ठीक करवाने के बाद ही प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान करेंगे।
1 लाख 36 हजार में से मात्र 42 हजार प्रॉपर्टी धारकों ने भरा बिल
वित्त वर्ष खत्म होने में मात्र तीन दिन शेष बचे हैं। मगर अभी तक शहर के एक लाख 36 हजार प्रॉपर्टी धारकों में से मात्र 42 हजार प्रॉपर्टी धारकों ने ही टैक्स बिल जमा करवाया है। करीब 25 हजार खाली प्रॉपर्टी के मालिक बिल बांटने वाली एजेंसी को नहीं मिल पाए। बाकी प्रॉपर्टी धारकों से बिल भरवाना भी निगम प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। बिल न भरने वालों में कई सरकारी संस्थान भी शामिल हैं।
पार्षद बोले- देर से शुरू हुई सुधार की प्रक्रिया
पार्षदों का कहना है कि प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के कर्मचारियों ने जमकर धांधलियां कीं। जिन शहरवासियों ने बिल जमा करवाए, उनकी रसीदों को ऑनलाइन सॉफ्टवेयर में अपलोड नहीं किया गया। नतीजतन, 25 फीसदी से भी अधिक शहरवासियों को एक बार बिल भरने के बाद भी दोबारा बिल भेजा जा रहा है। पार्षदों का कहना है कि जब निगम प्रशासन ने ब्रांच में सुधार शुरू किया, तब तक काफी देर हो गई। जितने शहरवासी बिल ठीक करवाने आ रहे हैं, उतने लोगों के समय पर बिल ठीक नहीं हो रहे हैं।
चुनाव लड़ते समय ली थी एनओसी, अब फिर आ गया बिल
वार्ड नंबर 17 के पार्षद महेंद्र जुनेजा ने दिसंबर में हुए निगम चुनाव लड़ने से पहले प्रॉपर्टी टैक्स भरकर अपने मकान व प्रतिष्ठानों की पांच एनओसी ले ली थी। उन्होंने इसे अपने नामांकन फार्म के साथ लगाया था। मगर अब पांच में से एक प्रॉपर्टी को छोड़कर बाकी चार का दोबारा से बिल भेज दिया गया है। किसी प्रॉपर्टी का 2200 तो किसी का 500 रुपये बिल आया है। ऐसा ही वार्ड नंबर तीन के पार्षद प्रतिनिधि पंकज दीवान के साथ किया गया था।
अब तक यह किए गए हैं प्रयास
-- सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया
-- उसके बाद कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई गई
-- ब्रांच के दो बार अधीक्षक बदले गए
-- पार्षदों के लिए शाम पांच बजे बाद प्रॉपर्टी टैक्स बिल ठीक करवाने का समय तय किया गया
-- कमिश्नर ने सभी कर्मचारियों का काम अलग-अलग बांटा
-- प्रत्येक कर्मचारी के साथ एक ऑपरेटर नियुक्त किया
ये बोले पार्षद
31 मार्च तो क्या प्रॉपर्टी टैक्स ब्रांच के कर्मचारी 30 अप्रैल तक भी शहरवासियों के गलत बिलों को ठीक नहीं करवा सकते हैं। बड़े पैमाने पर की गई धांधलियां अब परेशानी बनी हुई हैं। पार्षदों को भी घंटों इंतजार करने के बाद खाली हाथ लौटना पड़ता है।
-महेंद्र जुनेजा, पार्षद, वार्ड नंबर 17
हर रोज घर पर 20 से 30 वार्डवासी प्रॉपर्टी टैक्स बिल की समस्या को लेकर आते हैं। काफी लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ रही है। हमें नहीं लगता कि 31 मार्च तक सभी गलत बिलों में सुधार हो सकता है।
-भीम महाजन, पार्षद प्रतिनिधि, वार्ड नंबर 3
प्रॉपर्टी टैक्स बिलों की समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। वार्डवासी रोजाना बिलों में खामियों की समस्या रखते हैं। ब्रांच में जाते हैं तो कुछ बिल ठीक हो जाते हैं, जबकि कुछ के लिए अगली तारीख मिल जाती है।
-अमित ग्रोवर, वार्ड नंबर 14
प्रॉपर्टी टैक्स की पेंडिंग फाइलों को निपटाया जा रहा है। लगातार सुधार के प्रयास हो रहे हैं। कर्मचारी भी बढ़ाए गए। देर रात तक कर्मचारी काम करते हैं। पुरानी खामियों को सुधारने में वक्त लगता है। उच्चाधिकारी भी बराबर निगरानी कर रहे हैं। काफी हद तक सुधार हुआ भी है।
-हरदीप सिंह, ईओ, नगर निगम