कागजों में सिमटी स्ट्रे कैटल फ्री शहर की घोषणा, हाईवे पर घूम रहे लावारिस पशु
सिवानी मंडी। राज्य सरकार की ओर से शहरों को लावारिस पशु मुक्त योजना प्रशासन की अनदेखी से कागजों तक सिमट कर रह गई है। शहर और गांव दोनों जगह लोग लावारिस पशुओं से परेशान हैं। ये लावारिस पशु शहर की सड़कों और हाईवे पर घूमते रहते हैं। इससे हादसे होने की आशंका बनी रहती है। वहीं गांव में लावारिस पशुओं से फसल को बचाने के लिए किसान रात को जागकर पहरा दे रहे हैं। लावारिस पशुओं की उचित व्यवस्था करने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन चला रही किसान सभा का दावा है कि पशुओं का कोई प्रबंध नहीं होने से कई क्षेत्र के किसानों ने खेती से किनारा कर लिया है।
गौरतलब है कि सिवानी में लावारिस पशुओं ने क्षेत्र के लोगों वाहन चालकों के अलावा किसानों की नाक में दम कर रखा है। झुंपा से हिसार तक नेशनल हाईवे 52 पर लावारिस पशु रोजाना हादसों को बढ़ावा दे रहे हैं। कई बार इन लावारिस पशुओं की वजह से क्षेत्र में हादसे हो चुके है लेकिन शासन और प्रशासन इस मामले को लेकर चुप्पी साधे हुए है। लावारिस पशुओं की लगातार बढ़ती फौज ने किसानों की भी रात की नींद हराम कर दी है। फसल को बचाने के लिए किसानों को रात भर खेतों में पहरा देना पड़ रहा है।
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पशुओं का झुंड खेतों से एक बार गुजरा, तो पूरी फसल खराब
किसान गुरमेज सिंह, संजय राणा, सुरेश बिश्नोई, राजाराम, रामकुमार व सरदारा सिंह ने बताया कि उन्होंने अपने खेतों में सरसों, गेहूं, चना और ज्वार की फसल की बिजाई की हुई है। बिजाई के बाद अगर एक बार भी पशुओं का यह झुंड उनके खेतों से गुजर गया तो उनकी मेहनत पर पानी फिर जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए वे रात भर अपनी नींद हराम कर खेतों में पहरेदारी कर रहे है। उनकी मांग है कि सरकार इन्हें लेकर कोई ठोस प्रबंध करे। गोरक्षा दल के सदस्य व एडवोकेट सुनील परिहार का कहना है कि नेशनल हाईवे पर लावारिस पशुओं की संख्या रोजाना बढ़ रही है। जिस पर काबू पाने की जिम्मेदारी टोल प्रशासन की है। टोल प्रशासन जान-बूझकर इस मामले में लापरवाही बरत रहा है।
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हमारे सुझाव लागू करे तो होगा समाधान-किसान सभा
लंबे समय से लावारिस पशुओं को लेकर आंदोलन कर रही अखिल भारतीय किसान सभा के राज्य सचिव दयानंद पूनिया, जिला पार्षद बलवान बागड़ी, जंगबीर ढांडा का आरोप है कि सरकार लावारिस पशुओं से निजात दिलाने के लिए लोगों के समक्ष गलत आंकड़े प्रस्तुत कर रही है। किसान सभा के अनुसार सरकार सरकार पशु मेले पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाए। साथ ही गाय के व्यापार को भी शुरू करवाए। इसके अलावा पशु क्रूरता के नाम पर जो कार्रवाई हो रही है उस पर तुरंत लगाम लगाई जाए और गो भक्तों की बजाय इस मामले की डोर प्रशासन के हवाले की जाए। उन्होंने दावा किया कि लावारिस पशुओं की वजह से बारानी इलाके के अधिकांश किसान खेती करने से कतरा रहे है।