अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने दो दशक पहले एम्स ने मुझे जवाब दे दिया था। प्राकृतिक और आध्यात्मिक खेती और चिकित्सा की ओर कदम बढ़ाए। अब पूरी तरह से स्वस्थ हूं। गुरुकुल की 180 एकड़ बंजर भूमि को उपजाऊ बना दिया। गुरुकुल के नेचुरोपैथी अस्पताल में एक लाख लोग स्वास्थ्य लाभ ले चुके हैं।
आचार्य देवव्रत मंगलवार को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक खेती विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर बोल रहे थे। आचार्य देवव्रत ने अपने खुद के जीवन का अनुभव साझा करते हुए बताया कि 1998 में मुझे एम्स ने जवाब दे दिया था। इसके बाद मैंने प्राकृतिक खेती और नेचुरोपैथी की ओर कदम बढ़ाए। कुरुक्षेत्र गुरुकुल के नेचुरोपैथी अस्पताल में एक लाख लोग स्वास्थ्य लाभ ले चुके हैं। गुरुकुल की 180 एकड़ जमीन को लोगों ने बंजर होने के चलते ठेके पर लेने से इनकार कर दिया था। हमने इसमें गाय के गोबर की खाद डालकर इसे तैयार किया। आज वही जमीन अन्य जमीन से बेहतर उत्पाद दे रही है।
कीटनाशक और उर्वरकों के प्रयोग के कारण भूमि, वायु, जल प्राकृतिक संसाधन जहरीले हो रहे हैं। यही जहरीले उत्पाद हम बेच रहे हैं। इन जहर को बेचने वालों पर धारा 302 लगनी चाहिए। कीटनाशक और कृत्रिम उर्वरकों से तैयार खाद्यान्नों, सब्जियों और फलों के प्रयोग से कैंसर फैल रहा है। हमें जैविक खेती विशेषकर जीरो बजट जैविक खेती की ओर बढ़ना होगा। एक गाय से बिना रासायनिक खादों के प्रयोग के 30 एकड़ भूमि में खेती की जा सकती है। जैविक खेती को लेकर किसानों में भ्रांति है कि इससे पैदावार बहुत कम होती है। अगर जीरो बजट खेती को अपनाएं तो पहले साल में ही बराबर उत्पाद मिलेगा। जैविक खेती के उत्पादों के दाम भी दो से तीन गुना तक मिलते हैं।
जीरो वेस्ट खेती होनी चाहिए
कुलपति प्रो. केपी सिंह ने कहा कि एचएयू में दीनदयाल उपाध्याय जैविक खेती उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया गया है। इसमें किसी भी उत्पाद को बाहर से नहीं लाया जाएगा। देश में प्राकृतिक खेती के उत्पादों की बहुत मांग है। हम मांग के अनुरूप इन उत्पादों की आपूर्ति करने में सक्षम नही हैं। विश्वविद्यालय को 12 करोड़ की एक परियोजना प्रदान की गई है। उन्होंने कहा कि कृषि में 80 प्रतिशत हिस्सा वेस्ट चला जाता है। खेती को जीरो वेस्ट पर लाना होगा। पौधे, फल, फूल, जड़ हर एक की कीमत मिलनी चाहिए। ऐसा होने पर ही खेती लाभदायक साबित होगी। भारतीय किसान संघ के आयोजक सचिव दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि कृषि को नई दिशा देना समय की मांग है। हमें पुन: गऊ कृषि वाणिज्य को स्थापित करना होगा। इसी से जलवायु परिवर्तन की चुनौती का भी समाधान कर सकेंगे।
किसानों को उनकी भाषा में मिले प्रशिक्षण : इंद्रेश कुमार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि खेती उत्तम थी, उत्तम है और उत्तम रहेगी। किसानों को सस्ती, सहज, उत्तम तकनीक प्रदान की जाएं। कृषि विशेषज्ञों से किसानों को उनकी भाषा में प्रशिक्षण दें। शहरों में प्रशिक्षण की बजाय किसानों को उनके गांव में जाकर व्यावहारिक ज्ञान के साथ प्रशिक्षण दें।
सब चुनौतियों का एक ही हल
कृषि विशेषज्ञ डॉ. सुभाष पॉलेकर ने मुख्य संभाषण में जीरो बजट प्राकृतिक खेती पर प्रकाश डाला। खेती में विभिन्न रसायनों पर निवेश, जलवायु परिवर्तन, खेती से विमुख हो रही युवा पीढ़ी बड़ी चुनौतियां हैं। सब चुनौतियों का हल जीरो बजट प्राकृतिक खेती से है। इस मौके पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मिंग सिस्टम रिसर्च के निदेशक डॉ. एएस पंवार भी उपस्थित थे।
सीडी और पुस्तकों का किया विमोचन
हिमाचल राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने जीरो बजट प्राकृतिक खेती-जहर से अमृत की ओर नामक फिल्म की सीडी और स्वदेशी खेती से आर्थिक सफलता विषय पर पुस्तक का विमोचन किया गया।
पांच राज्यों के 1200 प्रतिभागी ले रहे प्रशिक्षण...
कार्यशाला में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ से लगभग 1200 किसान भाग ले रहे हैं। इन्हें इन तीन दिनों में घट रही मृदा उर्वरता एवं उत्पादकता, रसायनों का मानव के स्वास्थ्य पर हो रहे दुष्प्रभावों के चलते समय की मांग के अनुरूप प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक खेती को अपनाने के बारे में जागरूक किया जाएगा।