114 में से 55 को किया पास
सब्जी मंडी के सचिव विनोद कुमार ने बताया कि मार्केट कमेटी ने मंडी का सर्वे किया था। मंडी में 114 दुकानदारों के पास लाइसेंस हैं। मार्केट कमेटी ने इन 114 दुकानदारों में 55 व्यापारियों को वैध माना तथा बाकी बचे 59 व्यापारियों को अवैध करार दिया। मार्केट कमेटी ने इन 55 दुकानदारों से दुकानें देने के लिए पूरी रकम का एक चौथाई एडवांस करीब 5 लाख 38 हजार रुपये भी पहले ही ले लिया है।
उस समय दुकान की कीमत मार्केट कमेटी ने 21 लाख 52 हजार रुपये रखी थी। इसके बाद कमेटी ने पास किए 55 व्यापारियों में से सिर्फ 16 दुकानदारों को दुकानें अलॉट की और 39 दुकानें के लिए कार्रवाई को रोक दिया गया। सचिव विनोद कुमार ने बताया कि दुकानदारों के दस्तावेजों की जांच करने के लिए मार्केट कमेटी ने एक कमेटी बैठाई जिसमें इन 39 दुकानदारों के कागजों में कमियां पाई गई और इनके अलाटमेंट रोक दिए गए हैं।
बिन बताए बढ़ाई दुकानों की रकम
सचिव विनोद कुमार ने बताया कि जिस समय दुकानों के अलॉटमेंट दिए जा रहे थे। उस समय दुकान की कीमत 21 लाख 52 हजार रुपये थी। लेकिन मार्केट कमेटी ने बिना व्यापारियों को बताए अब दुकानों की कीमत 30 लाख कर दिया है। ऐसे में व्यापारियों को काफी नुकसान हो रहा। उन्होंने बताया कि अगर मंडी में जो लाइसेंस धारी व्यापारी हैं, उन्हें उसी समय दुकानें दे दी जाती तो व्यापारी इस नुकसान से बच जाते।
16 दुकानदार ही जाकर क्या करेंगे
विनोद कुमार ने बताया कि जिन 16 व्यापारियों को नई सब्जी मंडी में दुकानें मिली हैं अगर ये सारे वहां चले जाए तो क्या वे वहां अपना धंधा चला सकते हैं। जब तक सारे दुकानदार वहां नहीं जाएंगे नई सब्जी मंडी में व्यापार चलाना संभव नहीं है। विनोद कुमार ने बताया कि मंडी के सारे व्यापारी नई सब्जी मंडी में जाने के लिए तैयार हैं। लेकिन मार्केट कमेटी की गलत नीतियों के कारण दुकान शिफ्ट करने का कार्य अटका हुआ है।
मार्केट कमेटी में चल रही है धांधली
सब्जी मंडी के उप प्रधान मोहनलाल सैनी ने बताया कि अगर मार्केट कमेटी चाहे तो जल्द से जल्द इस समस्या का हल निकास सकती है। लेकिन मार्केट कमेटी में हो रही धांधलियों के कारण ये काम रुका हुआ है। सैनी ने बताया कि अभी तक दुकानदारों के अलाटमेंट लैटर ही नहीं मिले हैं। उन्होंने बताय कि दुकानदारों की इस समस्या के लिए राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर कृषि मंत्री तक को शिकायत की जा चुकी है, लेकिन आज तक व्यापारियों के हित में कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
बरसात में हो जाता हैं नर्क से भी बदतर
सब्जी मंडी में दुकानदार राधेश्याम ने बताया कि बरसात के दिनों में मंडी का हाल नर्क से भी ज्यादा बुरा हो जाता है। उन्होंने बताया कि शहर के बीच में मंडी होने के कारण आए दिन यातायात की समस्या रहती है। जिसके कारण लोगों को भी परेशानी होती हैं। इसके अलावा मंडी में सब्जियों और फलों का लदान करने और उतारने वाले वाहन जाम में फंस जाते हैं, जिससे सारी सड़क जाम हो जाती है।
उन्होंने बताया कि मंडी को बने करीब 40-45 साल हो गए हैं। पहले शहर की इतनी आबादी भी नहीं थी, लेकिन शहर का विस्तार होने के कारण अब परेशानियां शुरू हो गई हैं। राधेश्याम ने बताया कि बरसात के दिनों में मंडी में पानी भरने से गंदे हालात हो जाते हैं। नई सब्जी मंडी में दुकानें शिफ्ट करने के लिए मार्केट कमेटी ने बोली की कार्रवाई पहले ही कर ली, लेकिन अभी तक दुकानदारों को दुकानेें अलोट नहीं की गई हैं।
स्थानीय विधायक ने नहीं किए कोई प्रयास
दुकानदार राधेश्याम ने कहा कि स्थानीय विधायक ने इस मामले में बिलकुल भी रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि विधायक का कार्य अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को सुनना और उन्हें दूर करना है। लेकिन स्थानीय विधायक ने न तो एक दिन यहां आकर देखा कि हम कैसी परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर विधायक चाहे तो मार्केट कमेटी के अधिकारियों से इस मामले में जबाव तलव कर रिपोर्ट मांग सकती हैं कि दुकानों को शिफ्ट करने में कितनी कार्रवाई की गई है।
लावारिस पशु बने खतरा
मंडी में घुसते ही आपको लोगों से ज्यादा आवारा पशु घूमते नजर आ जाएंगे। इन जानवरों से लोगों को काफी खतरा रहता है। इनके कारण मंडी में गंदगी फैली रहती है।
शिफ्ट हो मंडी तो सुधर सकता है ट्रैफिक
क्षेत्र की पार्षद रेखा सैनी ने बताया कि सब्जी मंडी अगर यहां से शिफ्ट होती है तो निश्चित ही शहर का यातायात व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मंडी के बीच शहर में होने के कारण यहां ज्यादातर जाम की स्थिति रहती है।