अमर उजाला ब्यूरो
हिसार। शहर की अगली सरकार के लिए पार्टियां सीधे मैदान में उतरेंगी। मेयर का चुनाव अब 20 पार्षद नहीं नगर निगम के करीब 2 लाख 26 हजार मतदाता करेंगे। सीधे तौर पर चुनाव कराए जाने से नगर निगमों के चुनाव काफी रोचक होंगे। निगम के ये चुनाव अब राजनीतिक दलों के लिए अग्नि परीक्षा साबित होंगे। लोकसभा चुनाव से पहले होने वाले चुनावों ने शहर की राजनीति में गर्मी ला दी है।
जानकारी के अनुसार नगर निगम मेयर का चुनाव अब राजनीतिक दलों को अपनी स्थिति के आंकलन का पता चलेगा। ये चुनाव राजनीतिक दलों के लिए एक चुनौती होगा। जिसमें अपने मेयर के समर्थन में राजनीति के दिग्गजों को आना होगा। मेयर की टिकटों के लिए भी घमासान होना तय है। जिले की 7 विधानसभा में किसी भी विधानसभा में 2 लाख 26 हजार 210 मतदाता नहीं है। मेयर चुनाव के लिए 2.26 लाख मतदाता वोट डालेंगे। ऐसे में यह चुनाव विधायक के चुनाव से कहीं ज्यादा बड़ा होगा। सीधे चुनाव के बाद मेयर को कुर्सी जाने का भय भी नहीं होगा और पार्षदों की खरीद-फरोख्त पर भी लगाम लगेगी। इसके अलावा शहर के विकास कार्यों में भी तेजी आएगी। जो मेयर चुनकर आएगा, उसकी शक्तियां भी बढ़ेगी। इसके अलावा अधिकारियों की मनमानी पर भी रोक लगेगी। एक वार्ड विशेष की बजाय पूरे शहर की जनता का मेयर से सीधा जुड़ाव होगा। मेयर पर भेदभाव के आरोप भी कम होंगे।
राजनीतिक मायने
इस चुनाव के जरिए भाजपा को शहरों में अपनी मजबूती का पता चलेगा। शहरों में भाजपा को मजबूत माना जाता रहा है। अगर निगमों में भाजपा अपने मेयर बना लेगी तो लोकसभा चुनाव के लिए माहौल बनाने में उसे काफी मदद मिलेगी। साथ ही भाजपा को ग्राउंड रियालिटी का पता भी लगेगा। कांग्रेस तथा इनेलो के लिए भी अपनी शक्ति प्रदर्शन करने का यह मौका है।
बहुमत जुटाने की राजनीति खत्म होगी
सीधे चुनाव के चलते जो लोग बहुमत जुटाकर मेयर की कुर्सी हासिल करने की फिराक में थे उनकी राजनीति खत्म हो जाएगी। कुछ भावी मेयर ने तो पहले से ही भावी पार्षदों से मिलकर जोड़तोड़ शुरू कर दिया था। अब इस फैसले से पूरे समीकरण बदल गए हैं।
लोकतंत्र में प्रदेश सरकार का यह फैसला बहुत अच्छा है। मेयर को काम करने में आसानी होगी। हर आदमी को मेयर चुनने का मौका मिलेगा। इससे मेयर की जवाबदेही भी बढ़ेगी। भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी। पार्षदों की खरीद-फरोख्त जैसा सिस्टम ही खत्म हो जाएगा।
डॉ. कमल गुप्ता, विधायक, हिसार
प्रदेश सरकार द्वारा जो निर्णय लिया गया है, यह काफी महत्वपूर्ण और सराहनीय फैसला है। इसका फायदा सीधे तौर पर जनता को मिलेगा। मेयर खुलकर विकास कार्य करवा सकेगा।
शकुंतला राजलीवाला, पूर्व मेयर, नगर निगम
प्रदेश सरकार का मेयर पद का चुनाव प्रत्यक्ष करवाने का अच्छा फैसला है। जनता के बीच से कोई सीधा चुना हुआ व्यक्ति मेयर बनेगा तो शहर के विकास पर अधिक जोर देगा। ऐसे फैसले का स्वागत होना चाहिए। अगर हमारे समर्थक भी हमें मेयर पद का चुनाव लड़ने के लिए कहेंगे तो निश्चित तौर पर हम भी मैदान में उतरेंगे।
भीम महाजन, पूर्व डिप्टी मेयर
मेयर पद के लिए डायरेक्ट चुनाव करवाने का फैसला सराहनीय है। कई दूसरे प्रदेशों में भी ऐसी व्यवस्था है। अगर प्रदेश में यह व्यवस्था लागू होती है तो निश्चित तौर पर इसका शहरवासियों को फायदा होगा।
हनुमान ऐरन, पूर्व प्रधान, नगर परिषद
अभी इस फैसले की डिटेल तो नहीं आई है। फिर भी यह फैसला बहुत बढ़िया है। इससे मेयर के साथ-साथ पार्षदों की भी पावर बढ़ेगी। पावर बढ़ने से शहर में विकास कार्यों में तेजी आएगी। अधिकारियों की मनमानी पर भी रोक लगेगी।
अनिल जैन, पूर्व पार्षद, वार्ड नंबर एक
फैसले की पूरी जानकारी आने के बाद ही इस पर टिप्पणी कर सकेंगे। सरकार ने क्या सोचकर यह फैसला लिया। किस तरह से चुनाव होगा। इसकी क्या टर्म कंडीशन होंगी। इन जानकारी के बाद ही अपनी राय देंगे।
रणबीर गंगवा, विधायक नलवा।