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मय्यड़ में किसानों ने दूध बहाकर किया प्रदर्शन का आगाज

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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
मय्यड़ गांव में किसानों ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करवाने और किसानों का पूर्ण रूप से कर्जामाफी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने तीन सो लीटर दूध को गरीबों में बाटा। दस जून से किसानों का लगातार विरोध प्रदर्शन चलेगा। किसान दूध सहित अपनी कोई भी फसल बाजारों में नहीं सप्लाई करेंगे। दस जून तक चलने वाले इस सरकार विरोधी प्रदर्शन के बाद भी किसानों की मांग पूरी नहीं हुई तो किसान राष्ट्र स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। शुक्रवार को मय्यड़ गांव में किसानों के प्रदर्शन की अध्यक्षता प्रदेश किसान संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव ने की। जोगिंद्र मय्यड़ ने बताया कि केंद्र सरकार से हमारी मांग है कि जल्द से केंद्र सरकार स्वामीनाथन की रिपोर्ट को लागू करें व किसानों का कर्जा माफ करें। उन्होंने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने और कर्जा माफ करने की बात कही थी। आज चार साल बाद भी किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इन दो मुख्य मांगो को लेकर ये प्रदर्शन किया जा रहा है।

ये बोले किसान प्रदर्शनकारी
किसान संघर्ष समिति के प्रदेश महासचिव महेंद्र सिंह पूनिया और प्रेस प्रवक्ता विकास सीसर ने बताया कि जब तक सरकार किसानों की मांग पूरी नहीं करेगी, ये प्रदर्शन इस तरह जारी रखेंगे। दस जून तक किसान शहर से न तो कोई फसल बेेचेगा व न ही कोई सामान खरीदेगा। ताकी सरकार को पता चल जाए कि देश की अर्थ व्यवस्था को किसान चलता है। न कि बड़े शहर चलाते हैं। दस दिनों के लिए प्रदेेश के किसान गांव बंद करके छुट्टी पर हैं। दस जून तक प्रदर्शन शांती स्वरूप चलेगा। महेंद्र सिंह पूनिया ने बताया कि रविवार को रायपुर रोड पर सब्जी रोड पर डालकर प्रदर्शन करेंगे। इसी तरह हर दिन अलग तरीकों से विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे।
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168 किसान संगठनों ने दिया समर्थन
दस जून तक चलने वाले किसान प्रदर्शन में देशभर के 168 किसान संगठनों से अपना समर्थन दिया है। जोगिंद्र मय्यड़ ने बताया दस जून के बाद सभी किसान संगठन के पदाधिकारी बैठकर निर्णय लेंगे। देश के सभी किसान संगठन इस प्रदर्शन में सहयोग कर रहे हैं। शुक्रवार को हुए प्रदर्शन में पहले तो किसानों ने करीबन 50 लीटर दूध जमीन पर बहा दिया। परंतु बाद में किसानों ने कहा कि दूध बहुत कीमती होता है। बाद में किसानों ने दूध को जमीन पर बहाने की बजाय बच्चों और गरीबों में बांटना शुरू कर दिया।
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