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Hisar News: चुनाव के बाद 11 महीने बीते, जिले की 39 पंचायतों को विकास की ईंट लगने का इंतजार

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हिसार। चुनाव के करीब 11 महीने बाद भी ग्रामीणों का विकास कार्याें का इंतजार है। जिले में 39 पंचायतों को विकास की ईंट लगने की शुरुआत होने की प्रतीक्षा है। कई गांवों में जहां विकास कार्याें की शुरुआत हुई वहां भी काम रुके हुए हैं। जिले में कुल 305 पंचायत हैं। बड़े विकास कार्याें के लिए टेंडर की शर्त अब भी है। जिसका सरपंच विरोध कर रहे हैं।
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करीब दो साल की देरी से नवंबर 2022 सरपंचों के चुनाव हुए थे। लोगों को उम्मीद थी कि अब तेजी से काम शुरू होंगे। सरपंचों के चुनाव के बाद सरकार की ओर से टेंडर की शर्त लगा दी गई। जिसका सरपंचों ने विरोध शुरू कर दिया। जिस कारण विकास कार्याें में देरी होने लगी। सरकार का विरोध कर रहे सरपंचों ने अपने क्षेत्र में विकास के लिए कोई आवेदन नहीं किए। कुछ पंचायतों में सरकार की ओर से महज 20 से 30 हजार रुपये के गली की सफाई आदि के टेंडर लगाए गए हैं। बता दें कि वर्ष 2020 में मार्च महीने में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो गया था। जिसके बाद सरकार ने करीब दो साल तक चुनाव नहीं कराया। जिस कारण इस समय में पंचायतों में विकास कार्य नहीं हुए। ग्रामीणों को इंतजार था कि सरपंचों के चुनाव के बाद जिले में तेजी से विकास कार्य होंगे। जिला परिषद में भी विकास कार्याें की गति धीमी है। जिला परिषद के कुछ सदस्यों ने विकास कार्याें की शुरुआत कराने के लिए धरन भी दिया था।
चार महीने से इंतजार
पंचायत विकास मंत्री गांव किरतान में आए थे। जहां ग्रामीणों ने ईंट-टायल से सड़क निर्माण को लेकर शिकायत दी थी। गांव के लोगाें ने मंत्री को ईंट दिखाते हुए कहा था कि यह ईंट प्रयोग की जा रही हैं। जिसके बाद मंत्री ने जांच के आदेश दिए थे। मौके पर काम बंद कराने के आदेश भी जारी किए थे। इसके बाद भी अब तक काम दोबारा शुरू नहीं हो सका।
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सरपंच एसोसिएशन का विरोध जारी

सरपंच एसोसिएशन का सरकार के खिलाफ विरोध अब भी जारी है। एसोसिएशन की ओर से 5 नवंबर को में फतेहाबाद में रैली का आयोजन किया जाएगा। सरपंचों ने 25 अक्तूबर को मेरी माटी कलश यात्रा के कार्यक्रम में शामिल न होकर अपना विरोध जताया।
भगवानदास, जिला प्रवक्ता, सरपंच एसोसिएशन, हिसार
पंचायतों में तय मानकों के अनुसार विकास कार्य कराए जा रह हैं। टेंडर के अनुसार भी काम हो रहे हैं। सरपंच एक साल में 25 लाख रुपये तक के विकास कार्य करा सकते हैं। इसके बाद कोई कार्य कराने के लिए टेंडर प्रक्रिया को अपनाया जाता है। जिन पंचायतों की ओर से काम नहीं किए गए होंगे वहां काम नहीं हुए।-
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सुभाष शर्मा, जिला पंचायत
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