बास (हिसार)। बेटियों की सुरक्षा को लेकर सरकार के फैसले जमीन तक पहुंचते-पहुंचते दम तोड़ देते हैं। जमीनी हकीकत इसके विपरीत बनी हुई है। आए दिन स्कूलों में बच्चियों से हो रही छेड़छाड़ और दुष्कर्म की घटनाओं से परिजन चिंतित हैं। कोर्ट के आदेशानुसार सभी स्कूलों में शिकायत पेटिका का होना अनिवार्य है, लेकिन बार-बार हो रहे हादसों के बावजूद शिक्षा विभाग कोई सबक नहीं ले रहा है। अक्सर बच्चे डर के मारे अपनी बात स्कूल में अध्यापकों के सामने नहीं रख पाते, जिसके लिए शिकायत पेटी का विद्यालय में होना अनिवार्य किया गया है। जब अमर उजाला टीम ने नारनौंद क्षेत्र के इस स्कूल की की हकीकत सामने आई। लापरवाही इस कदर है कि किसी भी स्कूल में शिकायत पेटी शिक्षा विभाग या स्कूल के द्वारा नहीं लगाई गई है। आखिरकार बेटियां शिकायत करें तो कहां, कैसे और किससे करें। डर या झिझक के कारण उनकी आवाज अंदर ही दबी रह जाती है। अगर स्कूलों में शिकायत पेटी लगी होती तो शायद स्कूलों में आए दिन हो रहे छेड़छाड़ व दुष्कर्म के मामलों पर समय रहते अंकुश या उनमें कमी लाई जा सकती है। आखिरकार लापरवाही बरतने वाले स्कूलों पर शिक्षा विभाग या उच्च अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं करते। यह अपने आपमें बड़ा सवाल बना हुआ है।
विद्यालय में पढ़ रही हैं 175 लड़कियां
विद्यालय में कुल बच्चों की संख्या की बात करें तो 175 बच्चियां इस विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के लिए आती हैं। लड़कियां शिक्षकों के डर, खौफ के कारण किसी को कुछ नहीं कह पाती। हादसे के बाद स्कूल में संख्या कम रही है।
यह बोले हांसी द्वितीय खंड शिक्षा अधिकारी
शिकायत पेटी को लेकर जब हमने शिक्षा विभाग के हांसी द्वितीय खंड शिक्षा अधिकारी राजेश जैन से बात की तो उन्होंने बताया कि हर स्कूल में शिकायत पेटी होना अनिवार्य है। कुछ साल पहले शिकायत पेटी स्कूलों में लगाई गई थी। उसका इस्तेमाल न होने की वजह से वह पेटियां धीरे-धीरे खत्म हो गई। उन्होंने इस मामले पर जल्द ही सभी स्कूलों को आदेश जारी कर जिस भी स्कूल में शिकायत पेटी नहीं लगी, उसमें लगवाने की बात कही। उन्होंने माना कि शिकायत पेटी होने से हादसों में कमी हो सकती है।
यह बोले अभिभावक
जब हमने इस मामले में बच्चियों के परिजनों से बात की तो उन्होंने बताया कि स्कूलों में शिकायत पेटी का होना बहुत जरूरी है। कुछ बच्चे अपनी झिझक के कारण अध्यापकों से अपनी बात नहीं रख पाते। अगर स्कूल में शिकायत पेटी लगी है तो बच्चे अपनी शिकायत उस पेटी में लिखकर डाल सकते हैं। जब स्कूल प्रशासन उस पेटी को खोलेगा तो वह शिकायत स्कूल प्रशासन की नजर में आ जाएगी।
दिसंबर 2017 में दरिंदगी का शिकार होने से बच गई थी बच्ची
नारनौंद क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल में नौ साल की बच्ची को उसके ही टीचर ने हवस का शिकार बना डाला। दिसंबर 2017 में एक मासूम स्कूल में दरिंदगी का शिकार होने से बच गई थी। स्कूल की मेड ने दरिंदे के इरादों को भांपते हुए उस पर हमला बोलकर छात्रा को बचाया था।
हर एक स्कूल, कॉलेज, शिक्षण संस्थान में शिकायत पेटिका लगाना अनिवार्य है। अगर कोई स्कूल ऐसा नहीं कर रहा तो उसकी लापरवाही है। ऐसे स्कूल प्रबंधक पर कार्रवाई होनी चाहिए।
-सुनीता यादव, जिला बाल संरक्षण अधिकारी, हिसार