अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
शर्तों के फेर में फंसे किसान सरकारी खरीद एजेंसी पर आए लेकिन अपनी फसल कम कीमत पर आढ़तियों को बेचने को मजबूर हो गए। किसानों को सरसों के दाम 4000 रुपये की बजाय 3500 से 3600 रुपये प्रति क्विंटल मिले।
हैफेड के अतिरिक्त महाप्रबंधक जोगेंद्र सिंह सरसों खरीद जांच करने के लिए नई अनाज मंडी में पहुंचे। उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि शेड्यूल के अनुसार सरसों खरीदी जाएगी। गुणवत्ता के मानक पूरे करने पर ही खरीद होगी। गांव के अनुसार पूरा शेड्यूल जारी किया गया है। किसान फसल को सूखाकर लाएंगे तो किसानों को कोई दिक्कत नहीं आएगी। अधिकारियों के दावे के विपरित किसान आढ़तियों को ही सरसों बेचते दिखे। गांव खरकड़ी के किसान राजेंद्र कुमार ने कहा कि हमारे गांव का नंबर पता नहीं कब आएगा। अब कितने दिन तक इंतजार करें।
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बास में भी नहीं हुई खरीद
बास की अनाज मंडी में सरसों की कोई खरीद नहीं हो सकी। 15 मार्च से सरसों की खरीद शुरू होनी थी। रोस्टर देरी से आने के कारण किसान अब तक सरसों नहीं बेच पा रहे। 17 मार्च को भी बास मंडी में सरकारी एजेंसी ने कोई खरीद नहीं की।
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किसानों पर थौंपी गई शर्तें
-फसल गिरदावरी, पटवारी या तहसीलदार से सत्यापित खाता-खतौनी नंबर जरूरी
- सरसों की बिजाई करने का रिकार्ड जरूरी
-किसान अपना आधार कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड
- राशन कार्ड आदि पहचान पत्र भी साथ लाएं।
-किसान अपने बैंक खाते की कॉपी लाएं
- अपना पासपोर्ट साइज फोटो भी लेकर आएं
- एक किसान से केवल 25 क्विंटल सरसों खरीदी जाएगी
- किसान को भुगतान बैंक खाते में होगा
- किसान बैंक पासबुक की प्रति, आईएफ एससी कोड लेकर आएं
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खरीद के लिए गुणवत्ता की शर्तें
तोरिया की मात्रा 10 प्रतिशत से अधिक न हो
मिट्टी, तूडी की मात्रा 2 प्रतिशत से ज्यादा न हो
कटे हुए दाने की मात्रा 2 प्रतिशत से अधिक न हो
छोटे दानों की मात्रा 10 प्रतिशत से कम होनी चाहिए
नमी की मात्रा 8 प्रतिशत से कम होनी चाहिए
कच्चे दाने की मात्रा 4 प्रतिशत से कम होनी चाहिए