गांव सिंघवा खास में हुई तीसरी राष्ट्रीय पशुधन चैंपियनशिप में देशभर की विख्यात भैंसों का कैटवॉक करवाया गया। इन भैंसों और झोटों की कीमत बीएमडब्ल्यू कार से भी ज्यादा है। इसके बावजूद इनके मालिक इनको बेचने को तैयार नहीं हैं। नौ करोड़ के अर्जुन झोटे ने कैटवॉक करते हुए लोगों को झुककर प्रणाम किया।
अर्जुन से हर साल पांच लाख की कमाई
प्रतियोगिता में झोटों में मुख्य आकर्षण अर्जुन रहा। इसके मालिक कुंगड़ (भिवानी) निवासी पवन ने बताया कि उनका झोटा अर्जुन मात्र आठ साल का है। पवन के अनुसार हम लोग 25 साल से मुर्राह नस्ल के पशु पाल रहे हैं। अर्जुन को हमने बचपन से ही पाला-पोसा है।
अर्जुन की डाइट : हर रोज 10 किलो दूध, दाना, चना और खल
इसके खाने में हर रोज 10 किलो दूध, दाना, चना और खल दिया जाता है। इसके सीमन से सालाना लगभग पांच लाख रुपये की आमदनी होती है। ब्यूटी कांटेस्ट के लिए चार रिटायर्ड डॉक्टर लिए गए हैं। डॉ बलबीर ढांडी, डॉ. दयानंद दहिया, डॉ. आरएस यादव, डॉ. आरके बैनीवाल को नियुक्त किया गया है। प्रतियोगिता में आए पशुओं का हर प्रकार से निरीक्षण करके उनको विजेता घोषित करेंगे।
ब्यूटी कांटेस्ट : खरकड़ा के राजेश की कटड़ी रानी प्रथम
प्रतियोगिता के आयोजक ईश्वर सिंह और अशोक कुमार ने बताया कि दो दिवसीय प्रतियोगिता में पहले दिन एक से छह महीने तक की कटड़ियों के लिए ब्यूटी कांटेस्ट हुआ। इसमें खरकड़ा (रोहतक) के राजेश की कटड़ी रानी प्रथम, मंडी आदमपुर के किसान सुनील की कटड़ी बीनू ने द्वितीय और बालक गांव के किसान नरेश की माया ने तृतीय स्थान हासिल किया।
रैंप पर धन्नो, हेमामालिनी, पार्वती, रानी, मीनू, गिन्नी, यमुना ने बिखेरे जलवे
देशभर की मुर्राह नस्ल की भैंसों का रैंप शो भी आयोजित किया गया। इसमें धन्नो, हेमामालिनी, पार्वती, रानी, मीनू, गिन्नी, यमुना ने अपने जलवा बिखेरा। इस पर दर्शकों ने इनके जलवे देखकर जमकर तालियां बजाईं।
सिंघवा गांव मुर्राह नस्ल के लिए अग्रणी
सिंघवा गांव मुर्राह नस्ल के लिए अग्रणी के तौर पर जाना जाता है। इस गांव की भैंसों ने दुग्ध प्रतियोगिताओं व सुंदरता में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। इस गांव की भैंसें लग्जरी गाड़ियों से भी महंगी हैं। प्रदेशभर में हजारों किसान मुर्राह नस्ल की भैंसों को पालकर अपनी आमदनी को बढ़ा रहे हैं।
पशु अस्पताल के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन देने की घोषणा
सांसद दुष्यंत का कहना है कि बजट सत्र में मांग रखी जाएगी कि पशुपालकों को भी विशेष पैकेज के तहत इनको ऊंचा उठाने का काम करे। सांसद ने सिंघवा गांव के पशु अस्पताल के लिए एक अल्ट्रासाउंड मशीन देने की घोषणा की, जिससे पशुपालकों को उपचार के लिए दूर दराज न जाना पड़े। चैंपियनशिप में पहुंचे सांसद का कहना है कि सरकार ने मुर्राह नस्ल के पालकों को जागरूक करने और बढ़ावा देने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। जागरूकता कैंपों का आयोजन करें, जिससे पशुपालकों को अधिक मुनाफा मिले।
पशुपालक नहीं, ब्रीडर बनें किसान : निदेशक इंद्रजीत
केंद्रीय भैंस अनुसंधान केंद्र के निदेशक इंद्रजीत सिंह ने बताया कि इस गांव ने मुर्राह नस्ल को पहचान दिलवाने में अहम भूमिका निभाई है। प्रदेश के किसान पशुपालक न बनकर ब्रीडर बनें। दूध के साथ अन्य उत्पादन भी करके खुद का रोजगार तैयार करें। प्रतियोगिता के आयोजक ईश्वर सिंघवा और अशोक कुमार ने बताया कि प्रतियोगिता में देशभर से सैकड़ों मुर्राह नस्ल की भैंसें और झोटों ने भाग लिया। सबसे पहले इनका कैटवॉक करवाया गया। उसके बाद अलग अलग कैटेगरी में प्रतियोगिताएं करवाई गईं। सभी विजेता रहने वाली भैंसों को रविवार को इनाम देकर सम्मानित किया जाएगा। इस दौरान किसानों को भैंस पालने के लिए जागरूक भी किया।