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जीजा को फंसाने मांगी थी चौथ, पहुंचा जेल

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वकीलान बाजार स्थित रूपम कलेक्शन के मालिक से 10 लाख रुपये की चौथ मांगने के मामले में पुलिस ने मोठ निवासी मास्टर माइंड अरुण को गिरफ्तार कर लिया है।
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आरोपी अरुण ने प्रेम विवाह करने वाले जीजा से रंजिश निकालने के लिए उसे फंसाने के चक्कर में पूरी साजिश रची। आरोपी ने बाकायदा अपने जीजा राजेश की आईडी पर बरवाला से सिम निकलवाया।

शहर में आकर वकीलान बाजार स्थित कपड़ा व्यापारी विष्णु कुमार से 10 लाख रुपये की चौथ मांग ली। पुलिस ने आरोपी की लोकेशन तलाश कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

एसपी शिबास कविराज ने बताया कि अरुण सरपंच के यहां मनरेगा में मेट है। उसकी बहन ने गांव के ही राजेश से 4 फरवरी 2013 को लव मैरिज की थी।

उसी के चलते राजेश का साला अरुण उससे रंजिश रखने लगा। उसने बरवाला से अपने जीजा राजेश की आईडी से सिम निकलवाया और शहर में आकर व्यापारी के साइन बोर्ड पर लिखे मोबाइल नंबर पर 6 मई को मैसेज और कॉल कर चौथ मांग ली। इससे व्यापारियों में दहशत के साथ-साथ भारी रोष पैदा हो गया था।
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पुलिस कप्तान ने मामले का पटाक्षेप करते हुए बताया कि अरुण ने मोठ के ही अपने जीजा की आईडी और फोटो उसकी बहन के साथ लव मैरिज में प्रयोग किए गए कागजात से निकाले थे। आईडी की फोटोस्टेट कॉपी देकर उसने सिम हासिल कर लिया।

अरुण की बहन राजेश के पास गांव में ही कंप्यूटर की क्लास लगाने जाती थी तभी दोनों में प्रेम हो गया। राजेश बीएड पास है।

उन्होंने लड़की पक्ष के खिलाफ जाकर गाजियाबाद के विजय नगर में जाकर शादी की थी। शादी के बाद कई महीनों तक राजेश और उसकी पत्नी वहीं पर रहे। उसके बाद वह गांव में वापस आ गए।

अरुण बीए पास है। उसने वर्ष 2002 में जींद के राजकीय महाविद्यालय से बीए पास की थी। गांव में वह मेट के पद पर नौकरी करता था।

पुलिस का कहना है कि आरोपी अरुण पहले भी फर्जी आईडी से कई लोगों से अश्लील बातें कर चुका है और धमकी दे चुका है। उसने कई लोगों के पास अश्लील एसएमएस भी किए हैं।

हालांकि यह दूसरी बात है कि उन लोगों ने यह मामला हल्के में लेकर पुलिस को कोई शिकायत नहीं दी। पुलिस का कहना है कि जिन लोगों को अरुण ने एसएमएस और कॉल की है उनसे पूछताछ की जाएगी। कोई शिकायत देगा तो अरुण के खिलाफ अन्य मामले भी दर्ज किए जाएंगे।
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पुलिस एसपी शिबास कविराज का कहना है कि फर्जी आईडी पर सिम देने वाले बरवाला के मोबाइल दुकान संचालक के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

टेलीकॉम कंपनी को भी डीलरशिप कैंसिल करने के बारे में लिखा जाएगा। इसके अलावा टेलीकॉम कंपनीज के नोडल अधिकारियों से मिलकर प्री-एक्टिवेटिड सिम की नीति को खत्म करवाया जाएगा।
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