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हरियाणा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव : विधायकों को अल्टीमेटम, पक्ष में न किया वोट तो गांव में नहीं घुसने देंगे 

Tue, 09 Mar 2021 03:31 PM IST
निवेदिता वर्मा अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद/टोहाना/रतिया (हरियाणा)

सार

  • तीन कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने विधायकों के आवास पर किया प्रदर्शन  
  • ज्ञापन सौंपकर अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार के खिलाफ वोट करने का किया आह्वान 
  • चेतावनी दी कि अगर सरकार के पक्ष में वोटिंग की तो गांवों में घुसने नहीं दिया जाएगा
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हरियाणा में किसानों ने विधायकों को सरकार के खिलाफ वोट देने के लिए ज्ञापन दिया। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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तीन कृषि कानूनों के विरोध में संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर किसानों ने फतेहाबाद में विधायक दुड़ाराम, टोहाना विधायक देवेंद्र सिंह बबली और रतिया विधायक लक्ष्मण नापा के आवास पर प्रदर्शन किया। किसानों ने तीनों विधायक के प्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार के खिलाफ वोट करने का आह्वान किया। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर सरकार के पक्ष में वोटिंग की गई तो इन विधायकों को गांवों में घुसने नहीं दिया जाएगा।

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किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए विधायकों के आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। टोहाना में डीएसपी बिरम सिंह के नेतृत्व में थाना सदर व थाना शहर की टीम विधायक के निवास पर पहुंची। फतेहाबाद में विधायक दुड़ाराम के भाई द्वारका प्रसाद, टोहाना में विधायक देवेंद्र बबली के भाई विनोद बबली को ज्ञापन दिया गया। इस दौरान किसान नेता जगतार सिंह ने कहा कि तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान लगातार 103 दिन से प्रदर्शन कर रहे है लेकिन सरकार सुनवाई नही कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के खिलाफ 10 मार्च को विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाया जा रहा है, जिसके समर्थन में मतदान करने की मांग की गई है।


उचाना में किसानों ने निकाली पैदल यात्रा 
उचाना में किसानों ने मंगलवार को पुराना बस स्टैंड से पैदल यात्रा शुरू की। यह पैदल यात्रा शहर के बीचोंबीच निकाली गई। इस दौरान उचाना विधायक दुष्यंत चौटाला के खिलाफ नारेबाजी कर सरकार के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव के लिए वोट डालने की अपील की गई। किसानों ने कहा कि सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानून किसान विरोधी हैं जो किसान नहीं चाहते। सरकार को तुरंत प्रभाव से तीनों कृषि कानून वापस लेने चाहिए ताकि किसान स्वतंत्र रूप से अपनी खेती कर सकें।

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