दशहरा के दिन श्री दुर्गा रामलीला जैकमपुरा से रावण की सेना श्रीराम से युद्ध के लिए निकली। जैसे ही रावण की सेना सदर बाजार पहुंची, घनघोर युद्ध शुरू हो गया। जहां-जहां से रावण निकल रहा था, वहां-वहां उसका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए लोग उमड़ आए। कोई रावण के पांव छूकर आशीर्वाद प्राप्त कर रहा था तो कोई उनके पांव पर तेल चढ़ा रहा था।
रावण के दर्शन के लिए रामलीला ग्राउंड से गौशाला ग्राउंड तक लोगों का तांता लगा रहा। रास्ते भर महिलाएं रावण के चरणों में तेल और सिंदूर चढ़ाती रहीं। दहन के लिए बनाई गई प्रतिमा के पास भी लोग पूजा-अर्चना करते रहे। वहीं अपने बच्चाें को लेकर भी महिलाएं रावण के किरदार के बनवारी लाल सैनी से आशीर्वाद प्राप्त किया।
जैकमपुरा की ही सुमन ने बताया कि वह अपने परिवार की खुशहाली के लिए रावण से आशीर्वाद लिया। उसने प्रार्थना की कि रावण अपने साथ उसके सभी दुखों को ले जाए। उधर, गौशाला ग्राउंड में राम और रावण दल पहुंचे तो दोनों में घनघोर युद्ध हुआ। विभीषण के बताए उपाय से राम ने रावण का वध कर दिया। रावण के गिरते ही पूरे ग्राउंड में श्री राम के जयकारे लगने लगे। रावण के जलने से दु:ख होता है।
बनवारी लाल सैनी करीब 32 वर्षों से रावण का किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिस समय रावण का पुतला जलाया जाता है, उस समय वे बहुत दु:खी होते हैं। इतने वर्षों से रावण बनने के कारण उन्हें इस चरित्र से काफी प्रेम हो गया है। उन्होंने बताया कि जब रामलीला ग्राउंड से उनकी सवारी निकलती है तो लोग कहते हैं कि हारना मत। वहीं रावण की भूमिका निभाने वाले भूपेंद्र नारंग और गौरव शर्मा भी रावण के जलने से दुखी होते हैं।