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क्रोधवंत तब रावन लीन्हिसि रथ बैठाई

Wed, 09 Oct 2013 08:09 PM IST
अमर उजाला, गुड़गांव
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शहर में चल रही अधिकांश रामलीलाओं में सीताहरण का दृश्य दिखाया गया। सभी रामलीला कमेटियों ने इस दृश्य को हाईटेक तरीके से पेश किया। श्री सनातन धर्म सभा रामलीला कमेटी की रामलीला में दिखाया गया कि 14 वर्ष का वनवास काटने के लिए राम, सीता और लक्ष्मण वन-वन भटक रहे हैं।
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एक सुंदर सा स्थान देखकर तीनों वहां रहने का मन बनाते हैं। एक दिन शूर्पणखा वहां से गुजरती है। राम और लक्ष्मण को देखकर वह सम्मोहित हो जाती है। विवाह का प्रस्ताव रखती है, लेकिन राम और लक्ष्मण इसे ठुकरा देते हैं।

अपना अपमान महसूस होते देख शूर्पणखा आगे बढ़कर सीता पर हमला करने का प्रयास करती है, जिसे विफल करते हुए लक्ष्मण उसकी नाक काट देते हैं। इसकी जानकारी शूर्पणखा अपने भाई रावण को देती है।
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रावण को यह समझते देर नहीं लगती कि भगवान विष्णु ने मानव रूप में अवतार ले लिया है। रावण तय करता है कि वह मारीच की मदद से सीता का हरण कर लेगा। मारीच भी इसके लिए तैयार हो जाता है।

मारीच बना स्वर्ण मृग
राम और सीता कुटिया के बाहर बैठे होते हैं कि तभी सीता की दृष्टि एक स्वर्ण मृग पर पड़ती है। यह मारीच ही होता है, जो रूप बदलकर रावण का उद्देश्य पूरा करने के लिए आता है। सीता आग्रह करती हैं कि उन्हें यह सुंदर मृग किसी भी कीमत पर चाहिए। राम उन्हें समझाते हैं, लेकिन सीता के हठ के आगे बेबस होकर वह उसके शिकार के लिए दौड़ पड़ते हैं। राक्षस रूपी मृग उन्हें जंगल में काफी दूर ले जाता है। तभी हे सीते की आवाज सीता के कानों में पड़ती है और वह अपने पति को संकट में होने की बात कहकर लक्ष्मण को भेज देती है। मौका पाते ही लंकापति रावण साधु के रूप में उनका हरण कर लंका की ओर उड़ने लगता है। पुष्पक विमान में सीता हरण का यह दृश्य बेहद ही मनोहारी रहा। सीता हरण के बाद राम विलाप का दृश्य मनीष खुल्लर ने बड़े ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया।
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