शहर की सड़कों पर दौड़ रही सिटी बसों में पुलिस या हेल्पलाइन का नंबर नहीं लिखा है। कुछ बसों में आधे-अधूरे नंबर ही लिखे दिखाई देते हैं। बसों में ऐसा कोई इंतजाम नजर नहीं आता, जिससे महिलाओं की सुरक्षा के बारे में निश्चिंत हुआ जाए।
यहां तक कि कोई घटना होने के बाद महिलाएं मदद के लिए किसी से संपर्क तक नहीं कर सकतीं। इससे महिलाओं की सुरक्षा पर सवालिया निशान लग रहा है।
एक अंक कम लिखा है
नियम के अनुसार, रोडवेज बस के आगे या खिड़की के पास डिपो के निरीक्षक, पूछताछ और महाप्रबंधक कार्यालय का नंबर लिखा होता है, ताकि आपातकाल की स्थिति में इन नंबरों पर संपर्क किया जा सके। यह आपातकाल नंबर महिलाओं के अलावा किसी दूसरे यात्री या बस पर नियुक्त चालक-परिचालक के लिए हो सकता है। कुछ सिटी बसों में नंबर तो लिखा है लेकिन आधा-अधूरा। फोन नंबर से एक अंक गायब है। गुड़गांव का लैंडलाइन नंबर छह अंकों का है और सिटी बसों में महज पांच अंक ही लिखे हैं।
नहीं लिखा महिला हेल्पलाइन नंबर
दिल्ली की घटना को पूरा एक महीना बीत गया। पुलिस की ओर से महिलाओं के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर घटना से पहले से ही जारी किया हुआ है, लेकिन रोडवेज बसों में अभी तक वह नंबर नहीं लिखा गया है। पुलिस विभाग भी कई बार सवारी वाहनों में महिला हेल्पलाइन नंबरों के साथ पुलिस कंट्रोल रूम के नंबर लिखवाने का दावा कर चुका है, लेकिन न तो विभाग ही इस बारे में गंभीर है और न ही पुलिस।
चालक-परिचालक का पहचान पत्र भी नहीं
दिल्ली की घटना के बाद बड़े-बड़े दावों के बीच बसों में चालक और परिचालक की पहचान से संबंधित कोई भी दस्तावेज लगाने की बात कही गई थी, लेकिन सिटी बसों के साथ रोडवेज की दूसरी सेवाओं में यह दावा भी सिरे नहीं चढ़ा है।
बसों में कायदे से विभाग के तीन नंबर लिखे जाने चाहिए। अगर नंबर लिखने में त्रुटि हुई है तो इसकी जांच कर सही नंबर लिखवाए जाएंगे। साथ ही महिला हेल्पलाइन नंबर और पुलिस कंट्रोल रूम का नंबर भी लिखवाया जाएगा।
- यशेंद्र सिंह, महाप्रबंधक, डिपो